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नशीले पदार्थों का वांटेड तस्कर किशन सिंह UK से भारत प्रत्यर्पित, CPC ने कहा- बढ़ा सहयोग

लंदन: नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह को चलाने के आरोपी किशन सिंह को ब्रिटेन (UK) से भारत प्रत्यर्पित किया गया है. वह भारत में नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति कराने के आरोपों का सामना करेगा. यूके की ‘क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस’ (CPC) ने सोमवार को कहा कि प्रत्यर्पण का यह केस दोनों देशों के बीच ‘उच्च स्तरीय सहयोग’ को दिखाता है. ‘मेट्रोपोलिटन पुलिस एक्ट्राडिशन यूनिट’ ने राजस्थानी मूल के ब्रिटिश नागरिक को भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया.

दोनों देशों के बीच बढ़ा सहयोग

आरोपी को हीथ्रो हवाईअड्डे (Heathrow Airport) से वायुसेना (Air Force) के एक विमान के जरिए नयी दिल्ली लाया गया. ब्रिटिश अदालतों में प्रत्यर्पण मामलों में भारतीय प्राधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली CPC ने कहा, ‘ किशन सिंह को 21 मार्च 2021 को भारत को सौंपा गया. यह मामला ब्रिटिश और भारतीय अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय सहयोग को दिखाता है. उन्होंने ये भी कहा कि इस घटनाक्रम से ये भी सुनिश्चित होता है कि अपराधी विदेश भाग कर कानून के शिकंजे से बच नहीं सकते.

2018 में हुई थी गिरफ्तारी

सिंह पर मेफेड्रोन एवं केटामाइन जैसे नशीले पदार्थों को 2016-17 में भारत भेजने का आरोप है. उसे अगस्त 2018 में लंदन में प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ्तार किया गया था. उसने दिल्ली की तिहाड़ जेल में प्रतिकूल परिस्थितियों और मानवाधिकार आधार पर अपने प्रत्यर्पण का विरोध किया था. उसे तिहाड़ जेल में रखे जाने की संभावना है. डिस्ट्रिक जज जॉन जानी ने मई 2019 में उसके प्रत्यर्पण के समर्थन में फैसला सुनाया.

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इनका प्रत्यर्पण बाकी

ब्रिटेन से भारत में किसी आरोपी को प्रत्यर्पित किए जाने का यह दूसरा मामला है. इससे पहले कथित क्रिकेट सट्टेबाज संजीव चावला (Sanjeev Chawala) को पिछले साल फरवरी में लंदन से प्रत्यर्पित किया गया था. भारत ने किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मालिक विजय माल्या और हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भी धोखाधड़ी और धनशोधन के मामलों में प्रत्यर्पित किए जाने का ब्रिटेन से अनुरोध किया है, लेकिन उन्हें अभी तक प्रत्यर्पित किया गया है.

प्रत्यर्पण संधि के प्रावधान

भारत और ब्रिटेन की प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को प्रत्यर्पण कानून, 2003 के तहत भाग-दो देशों की सूची में रखा गया है. इसका अर्थ यह है कि किसी व्यक्ति के प्रत्यर्पण का आदेश देने का अधिकार कैबिनेट मंत्री के पास है. कानून के प्रावधानों के अनुसार मंत्री इस बात पर विचार करता है कि जिस व्यक्ति को प्रत्यर्पित किए जाने का अनुरोध किया गया है, उसे मृत्युदंड तो नहीं दिया जा सकता. यदि उसे भारत में मृत्युदंड दिए जाने की संभावना है तो उसे प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता.

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