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Dictator: एक मामूली आदमी से Germany का Chancellor बनने तक, दुनिया के सबसे बड़े तानाशाह Adolf Hitler की कहानी

सन 1918 में ही हिटलर ने नाजी पार्टी (Nazi Party) बनाई, जिसके सदस्यों में देशप्रेम कूट-कूटकर भरा गया. उसने स्वास्तिक को अपनी पार्टी का निशान बनाया.

Adolf Hitler Life Story: जब भी दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाहों का जिक्र होता है, तो सबसे पहले जर्मनी के पूर्व तानाशाह एडोल्फ हिटलर का नाम जेहन में आता है और दिल में एक सवाल उठता है, कि आखिर हिटलर जैसी शख्सियत का मालिक यूरोप के एक शिक्षित देश जर्मनी का हुक्मरान और लाखों लोगों का चहेता कैसे बन गया? तो हम आपको बताते हैं Adolf Hitler की पूरी कहानी (Adolf Hitler Biography). एक मामूली आदमी जो दुनिया का सबसे क्रूर तानाशाह बन गया, उसने लाखों लोगों का कत्ल करवा दिया, वो दुनिया के नक्शे से यहूदियों का नामो-निशान मिटा देने का सपना देखता था.

हिटलर की सनक की वजह से पूरी दुनिया दूसरे विश्वयुद्ध की आग में जल उठी. उस एडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल 1889 को आस्ट्रिया के वॉन इलाके में हुआ था. उसने अपने पिता की मौत के बाद 17 साल की उम्र में ऑस्ट्रिया छोड़कर वियना का रुख कर लिया. हिटलर को Art school में दाखिला नहीं मिला तो वो पोस्टकार्डों पर तस्वीरें बनाकर गुजर-बसर करने लगा. 1914 में जब पहला विश्व युद्ध (First World War) शुरू हुआ तो म्यूनिख में रह रहे एडोल्फ हिटलर ने सेना में भर्ती होकर फ्रांस में कई लड़ाइयों में हिस्सा लिया. एक लड़ाई के दौरान घायल होने पर हिटलर को अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा. फिर 1918 में जब विश्व युद्ध खत्म हुआ तो हिटलर को जर्मनी की हार का बेहद दुःख हुआ.

1918 में नाजी पार्टी बनाई

सन 1918 में ही हिटलर ने नाजी पार्टी (Nazi Party) बनाई, जिसके सदस्यों में देशप्रेम कूट-कूटकर भरा गया. उसने स्वास्तिक को अपनी पार्टी का निशान बनाया, जिसे हिन्दू धर्म के लोग एक शुभ प्रतीक मानते हैं. हिटलर की इस पार्टी ने पहले विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार के लिए यहूदियों को जिम्मेदार ठहराया. जर्मनी के आर्थिक हालात काफी खराब हो चुके थे. ऐसे में जब नाजी पार्टी के नेता एडोफ हिटलर ने अपने शानदार भाषणों में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का आश्वासन दिया, तो जर्मनी के लोग उसकी पार्टी की तरफ आकर्षित होने लगे. हिटलर ने जर्मनी के लोगों को सुखी जीवन का सपना दिखाते हुए, एक विशाल जर्मन साम्राज्य की स्थापना का वादा किया. साल 1922 तक जर्मनी में हिटलर की शौहरत काफी बढ़ चुकी थी.

हिटलर को जेल में डाला गया

हिटलर ने अखबारों में अपने दल के सिद्धांतों का प्रचार किया. सन 1923 में हिटलर ने जर्मनी की सरकार (German Government) को उखाड़ फेंकने की कोशिश की, लेकिन इसमें नाकामी मिली और हिटलर को जेल में डाल दिया गया. जेल में हिटलर ने मीन कैम्फ यानि ‘मेरा संघर्ष’ नाम की अपनी आत्मकथा लिखी. इस किताब में नाजी पार्टी के सिद्धांतों को बताते हुए हिटलर ने लिखा कि आर्य जाति सभी जातियों से श्रेष्ठ है और जर्मन आर्य हैं. उन्हें दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए. यहूदी हमेशा से संस्कृति में रोड़ा अटकाते आए हैं.

जर्मनी में बेरोजगारी ज्यादा बढ़ गई

साल 1930 और 1932 के बीच जर्मनी में बेरोजगारी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, अब संसद में नाजी पार्टी के सदस्यों की तादाद 230 हो चुकी थी. लेकिन फिर भी 1932 में हिटलर को राष्ट्रपति के चुनाव में कामयाबी नहीं मिली. जर्मनी की आर्थिक हालत बिगड़ती चली गई. 1933 में चांसलर बनते ही हिटलर ने जर्मनी की संसद को भंग कर दिया और सोशलिस्ट पार्टी की मान्यता भी रद्द कर दी (Adolf Hitler a Life From Beginning To End). डॉ जोजेफ गोयबल्स को हिटलर ने अपना प्रचारमंत्री बनाया. नाजी पार्टी के तमाम विरोधियों को जेल में डाल दिया गया और सरकार की सारी ताकत हिटलर ने अपने हाथों में ले ली.

देश का सर्वोच्च न्यायाधीश घोषित किया

हिटलर की ताकत की सनक बढ़ती गई और फिर साल 1934 में उसने अपनेआप को देश का सर्वोच्च न्यायाधीश घोषित कर दिया. इसी साल हिंडनबर्ग की मौत के बाद वो जर्मनी का राष्ट्रपति भी बन गया. धीरे धीरे नाजी पार्टी का आतंक बढ़ने लगा, सन 1933 से 1938 के बीच लाखों यहूदियों का कत्ल कर दिया गया. जर्मनी के नौजवानों में राष्ट्रपति हिटलर के आदेशों का पूरी तरह मानने की भावना भर दी गई और देश की तकदीर संवारने के लिए सारी ताकत हिटलर ने अपने हाथ में ले ली.

लीग ऑफ नेशन्स छोड़ा

साल 1933 में हिटलर ने League of Nations को छोड़ दिया और आने वाले युद्ध को ध्यान में रखते हुए जर्मनी की सैन्य ताकत बढ़ाना शुरू कर दिया. 1934 में जर्मनी और पोलैंड के बीच एक-दूसरे पर हमला न करने की संधि हुई. फिर इसी साल आस्ट्रिया की नाजी पार्टी ने वहां के चांसलर डॉलफस की हत्या कर दी. इसके बाद रूस, फ्रांस, चेकोस्लोवाकिया और इटली जैसे कई देशों ने जर्मनी की आक्रामक नीति से डरकर अपनी सुरक्षा के लिए आपस में संधि कर ली. इसी दौरान हिटलर ने ब्रिटेन के साथ एग्रीमेंट करके अपनी जलसेना को ब्रिटेन की जलसेना का 35 प्रतिशत रखने का वादा किया. इस संधि का मकसद भावी युद्ध में ब्रिटेन को किनारे रखना था, लेकिन 1935 में ब्रिटेन, फ्रांस और इटली ने हिटलर की ज्यादा हथियार जमा करने की नीति का विरोध किया.

वर्साय की संधि भी तोड़ी

साल 1936 में हिटलर ने वर्साय की संधि (Treaty of Versailles) को तोड़ दिया और अपनी सेना को पूर्वी फ्रांस में राइन नदी के इलाके पर कब्जा करने भेज दिया. 1937 में जर्मनी ने इटली से एग्रीमेंट किया और उसी साल आस्ट्रिया पर कब्जा कर लिया. इसके बाद हिटलर ने चेकोस्लोवाकिया के उन इलाकों पर कब्जा करने की इच्छा जताई जहां ज्यादातर निवासी जर्मन थे. ब्रिटेन, फ्रांस और इटली ने हिटलर को संतुष्ट करने के लिए म्यूनिख समझौते में चेकोस्लोवाकिया को मजबूर किया कि वो अपने जर्मन आबादी वाले प्रदेशों को हिटलर को सौंप दे.

चेकोस्लोवाकिया के हिस्सों पर कब्जा किया

1939 में हिटलर ने चेकोस्लोवाकिया के बाकी हिस्से पर भी कब्जा कर लिया. फिर हिटलर ने एग्रीमेंट करके पोलैंड का पूर्वी हिस्सा रूस को दे दिया और पोलैंड के पश्चिमी हिस्से पर उसकी सेनाओं ने कब्जा कर लिया. ब्रिटेन ने पोलैंड की मदद के लिए अपनी सेना भेजी. और इस तरह दूसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत हुई. फ्रांस की हार के बाद हिटलर ने मुसोलिनी के साथ एग्रीमेंट करके रोम सागर पर कब्जा करने का प्लान बनाया, फिर जर्मनी ने रूस पर हमला कर दिया. जब अमेरिका दूसरे विश्वयुद्ध (Second World War) में शामिल हुआ तो हिटलर की हालत बिगड़ने लगी.

30 अप्रैल को हुई थी मौत

हिटलर के सैनिक अधिकारी उसकी नीतियों के खिलाफ हो चुके थे और उन्होंने हिटलर के खिलाफ साजिश रचनी शुरू कर दी थी. जब रूसियों ने बर्लिन पर हमला किया तो डर के मारे हिटलर अपनी चांसलरी में बने बंकर में छुप गया. हिटलर को इटली के तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी की मौत की खबर मिल चुकी थी, मुसोलिनी को जैसी जिल्लत भरी मौत मिली, हिटलर को डर था कि कहीं उसके साथ भी वैसा सुलूक न हो, इसलिए 30 अप्रैल 1945, को हिटलर ने खुद को गोली मारकर (Adolf Hitler Cause of Death) आत्महत्या कर ली.

– फरीद अली

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