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इस तरह पाकिस्तान के कर्नल हसन ने हड़प लिया कश्मीर का ये बड़ा हिस्सा, अब बदतर हुए हालात

पाकिस्‍तान पिछले करीब एक दशक से इस हिस्‍से की स्थिति को बदलने की कोशिशें कर रहा है. पाक ने साल 2009 में पहली बार गिलगित-बाल्टिस्‍तान की स्थिति में बदलाव करना शुरू किया था. उस समय पाक सरकार की तरफ से गिलगित-बाल्टिस्‍तान एम्‍पावरमेंट एंड सेल्‍फ गर्वनेंस ऑर्डर को लाया गया था.

गिलगित बाल्टिस्‍तान एक बार‍ फिर से खबरों में है. पिछले दिनों यहां की सभा सर्वसम्‍मति से एक प्रस्‍ताव लेकर आई है. इस प्रस्‍ताव में पाकिस्‍तान की सरकार से कहा गया है कि वो इसे एक प्रांत का दर्जा प्रदान करे. साथ ही इसे संसद में प्रतिनिधित्‍व का अधिकार दे और दूसरे संवैधानिक निकायों को अधिकार दे.  यह प्रस्‍ताव यहां के मुख्यमंत्री खालिद खुर्शीद खान की तरफ से आया है.

खुर्शीद, पाकिस्‍तान की सत्‍ताधारी पार्टी पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के ही सदस्‍य हैं. भारत ने हर बार पाक को गिलगित-बाल्टिस्‍तान के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ न करने के लिए आगाह किया है. आइए जानिए क्‍या है गिलगित-बाल्टिस्‍तान और पीओके, कैसे पाकिस्‍तान ने भारत के इन हिस्‍सों पर गैरकानूनी तरीके से कब्‍जा किया हुआ है.

अंग्रेजों को दिया गया था लीज पर

सन् 1947 में जब अंग्रेजों ने भारत से जाने का फैसला किया और इसे आजाद करने का ऐलान किया तो देश के दो हिस्‍से भी हुए. भारत और पाकिस्‍तान बंट चुके थे और दुनिया के नक्‍शे पर एक नया देश आ चुका था. इसी वर्ष अक्‍टूबर में पाकिस्‍तान ने भारत पर हमला किया. दोनों देश पहली जंग में आमने-सामने थे.

पाकिस्‍तान ने जम्‍मू कश्‍मीर के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया था. इन्‍हीं हिस्‍सों को अब पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर यानी पीओके के तौर पर जाना जाता है. गिलगित-बाल्टिस्‍तान सन् 1935 से अंग्रेजों के पास था. उन्‍होंने इसे महाराजी हरि सिंह से लीज पर लिया हुआ था. अंग्रेज यहां की ऊंची पहाड़ियों से आस-पास के पूरे इलाके पर नजर रखते थे.

क्‍या हुआ था बंटवारे के बाद

कश्‍मीर समेत बाकी हिस्‍सों की निगरानी की जिम्‍मेदारी ‘गिलगित स्काउट्स’ के पास था जो सेना का हिस्‍सा थी. बंटवारे के बाद अंग्रेज भारत से चले गए और लीज खत्म कर के यह इलाका महाराज हरि सिंह को लौटा दिया गया. राजा ने तब ब्रिगेडियर घंसार सिंह को यहां का गर्वनर बनाया था. महाराज को गिलगित स्काउट्स के जवान भी मिले, जिनके ऑफिसर ब्रिटिश थे. इतिहास के मुताबिक उस समय मेजर डब्लूए ब्राउन और कैप्टन एएस मैथीसन महाराज के हिस्से में आए गिलगित स्‍काउट्स सेना के अफसर थे.

कैसे पाक ने किया कब्‍जा

सन् 1947 में जब पाकिस्तान की सेना ने कबायली लोगों की आड़ में जम्मू कश्मीर पर हमला किया, महाराज ने अपना राज्य भारत में मिला दिया. जंग के बाद 31 अक्टूबर को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर दस्तखत हुए. महाराजा हरि सिंह ने तो इस इलाके का भारत में मिला लिया मगर उनके इस कदम के बाद गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थानीय कमांडर कर्नल मिर्जा हसन खान ने विद्रोह कर दिया. कर्नल खान ने 2 नवंबर 1947 को गिलगित-बाल्टिस्तान की आजादी का ऐलान कर दिया. 21 दिनों तक इसकी यही स्थिति बनी रही. 21 दिन बाद पाकिस्तान इस क्षेत्र में दाखिल हुआ और उसने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया.

10 लाख की आबादी वाला गिलगित

गिलगित-बाल्टिस्‍तान की सीमाएं पश्चिम में खैबर-पख्‍तूनख्वा से, उत्तर में अफगानिस्तान के वाखान कॉरिडोर से, नॉर्थ ईस्‍ट में चीन के शिनजियांग से, दक्षिण में पीओके से और साउथ-ईस्‍ट में जम्मू व कश्मीर और लद्दाख से लगती हैं. गिलगित-बल्तिस्तान का कुल क्षेत्रफल 72,971 वर्ग किलोमीटर है.

यहां की आबादी करीब 10 लाख है और इसका एडमिनिस्‍ट्रेटिव सेंटर गिलगित शहर है, जिसकी जनसंख्या लगभग ढाई लाख है. गिलगित बाल्टिस्‍तान अक्‍सर मानवाधिकार उल्‍लंघन की वजह से भी सुर्खियों में रहता है. पाकिस्‍तान आर्मी को अक्‍सर ही यहां के लोगों पर अत्‍याचार करने के लिए दोषी ठहराया जाता है.

चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग का फेवरिट प्रोजेक्‍ट चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) इसी इलाके से गुजरने वाला है. चूंकि ये विवादित इलाका है, इसलिए चीन चाहता है कि सीपीईसी के तैयार होने के पहले इसके तमाम कानूनी पहलू पूरे कर लिए जाएं.

स्थिति में बदलाव की कोशिशें

पाकिस्‍तान पिछले करीब एक दशक से इस हिस्‍से की स्थिति को बदलने की कोशिशें कर रहा है. पाक ने साल 2009 में पहली बार गिलगित-बाल्टिस्‍तान की स्थिति में बदलाव करना शुरू किया था. उस समय पाक सरकार की तरफ से गिलगित-बाल्टिस्‍तान एम्‍पावरमेंट एंड सेल्‍फ गर्वनेंस ऑर्डर को लाया गया था.

भारत ने पाक को दो टूक कहा है कि पाकिस्‍तान को इस पर अपने सभी गैर-कानूनी कब्‍जे को छोड़ देना चाहिए और जम्‍मू कश्‍मीर में किसी तरह का बदलाव करने की कोशिशें नहीं करनी चाहिए.

भारत ने कई बार पाकिस्‍तान को साफ कहा है कि उसकी इस पूरे मसले पर स्थिति साल 1994 में संसद में पास हुए प्रस्‍ताव में स्‍पष्‍ट हो गई थी. इस प्रस्‍ताव को भारत की संसद ने सर्वसम्‍मति से पास किया था. इसके मुताबिक पाकिस्‍तान या फिर इसकी न्‍यायपालिका के पास कोई अधिकार नहीं है कि वह इस पर गैर-कानूनी और जबरन कब्‍जा करे.

साल 2018 में फिर पाक ने की कोशिशें

साल 2018 में पाकिस्‍तान नया ऑर्डर लेकर आया. इस ऑर्डर में पहले वाले आदेश को हटा लिया गया था. इसी नए आदेश के साथ इसे पांचवां प्रांत बनाने की कोशिशें भी तेज हो गईं. इस आदेश में गिलगित-बाल्टिस्‍तान के पास अपना प्रांतीय सरकार होने की मंजूरी दी गई थी. इस सरकार का नियंत्रण सत्‍ताधारी प्रधानमंत्री के पास होगा.

भारत सरकार की तरफ से कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्‍तान हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है, और हमेशा रहेगा. जम्मू कश्मीर के कुछ इलाके पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं. उन इलाकों में किसी भी तरह की एकतरफा हेराफेरी गैरकानूनी है और इसे बिल्‍कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगा. इस ऑर्डर के साथ इस हिस्‍से का नाम नॉर्दन एरियाज से बदलकर गिलगित बाल्‍टीस्‍तान कर दिया गया था.

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