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कई बार पिटने पर आई अक्ल? पाकिस्तानी सेना चीफ बाजवा बोले- भारत संग शांति को तैयार, हो रहे गरीब

भारत से कई बार युद्ध में हार और आतंकवाद के रूप में छद्म युद्ध में पिट चुके पाकिस्तान को अब अक्ल आने लगी है या फिर वह शांति का ढोंग दिखा नई साजिश रच रहा है? प्रधानमंत्री इमरान खान के बाद पड़ोसी मुल्क के सेना चीफ जनरल कमर जावेद वाजवा ने कहा है कि पाकिस्तान भारत के साथ बीती बातों को भूलकर शांति और बातचीत को तैयार है। भारत के साथ बेवजह टकराकर खुद को तबाह कर चुके देश के सेना प्रमुख ने कश्मीर की ओर इशारा करते हुए कहा है कि ऐसे मुद्दों की वजह से दक्षिण एशिया गरीबी में जा रहा है। विकास की बजाय पैसा हथियारों पर खर्च करना पड़ रहा है। 

पाकिस्तान न्यूज वेबसाइट डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद में नेशनल सिक्यॉरिटी डायलॉग को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख बाजवा ने कहा कि कश्मीर जैसे मुद्दे का समाधान निकालना जरूरी है और यह समय है कि भारत और पाकिस्तान बीती बातों को भूलकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के स्थिर रिश्तों से दक्षिण और मध्य एशिया में संपर्क बढ़ेगा। इसमें बहुत अधिक संभावनाएं है, लेकिन दो परमाणु संपन्न पड़ोसियों में विवाद की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा है।

बाजवा ने कहा, ”कश्मीर मुद्दा इसके केंद्र में है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि कश्मीर विवाद का शांतिपूर्वक समाधान हुए बिना उपमहाद्वीपीय तालमेल की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती है।” बाजवा ने आगे कहा, ”हम महसूस करते हैं कि यह इतिहास को दफनाकर आगे बढ़ने का वक्त है।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि बातचीत भारत पर निर्भर है और भारत को इसके लिए माहौल बनाना होगा। एक दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी कहा था कि रिश्ते को सामान्य बनाने के लिए भारत को कदम बढ़ाना होगा। 

भारत पहले ही साफ कर चुका है कि पाकिस्तान जब तक आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता है तब तक उसके साथ बातचीत नहीं हो सकती है। भारत ने बार-बार अपना स्टैंड साफ किया है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते हैं। 

‘होते जा रहे हैं गरीब’
बम-बंदूक और आतंकवाद की वजह से अपनी अर्थव्यवस्था को कंगाल कर चुके पाकिस्तान के सेना चीफ ने कहा कि दक्षिण एशिया के अनसुलझे मुद्दे पूरे क्षेत्र को गरीबी में धकेल रहे हैं। बाजवा ने कहा, ”यह जानकर दुख होता है कि आज भी यह (दक्षिण एशिया) व्यापार, बुनियादी ढांचे, जल और ऊर्जा सहयोग के मामले में दुनिया के सबसे कम एकीकृत क्षेत्रों में से एक है।” बाजवा ने आगे कहा, ”गरीब होने के बावजूद हम बहुत सारा पैसा रक्षा पर खर्च कर रहे हैं, जोकि मानव विकास की कीमत पर आता है।”

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