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जिन विदेशी पत्रकारों को बर्दाश्त भी नहीं करता था चीन, अब उन्हें लगाने जा रहा कोरोना वैक्सीन

चीन (China) ने कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान (Vaccination Program) के तहत पहली बार बीजिंग (Beijing) में काम करने वाले राजनयिकों और विदेशी पत्रकारों (Foreign Journalists) को टीका लगवाने की पेशकश की है. विदेशी पत्रकारों के लिए बुधवार को टीके के संबंध में जारी नोटिस में बताया गया है कि वे सीनोफार्म (SinoPharm) की ओर से विकसित टीका लगवा सकते हैं. चीन के राष्ट्रीय चिकित्सा उत्पाद प्रशासन ने कई शर्तों के साथ इस टीके (Vaccine) को अनुमति दी है.

यह टीका 18-59 उम्र वर्ग के लोगों को लगाया जा रहा है. भारत समेत अन्य देशों के दूतावासों के राजनयिकों को टीका लगवाने की पेशकश की गई है. नोटिस में कहा गया है कि स्वयं की इच्छा के आधार पर ही संबंधित अधिकारी टीके लेंगे और उन्हें इसके लिए पहले से ही हामी भरनी होगी. उन्हें इसका खर्चा भी खुद ही उठाना होगा.

6.5 करोड़ लोगों को लग चुका है टीका

हालांकि अभी इससे जुड़ी फीस के बारे में नहीं बताया गया है. नोटिस के साथ ही जारी परामर्श में कहा गया है कि प्रयोगों में यह सामने आया है कि यह टीका अपेक्षाकृत सुरक्षित है लेकिन टीका लेने पर बिल्कुल नगण्य प्रतिक्रिया की गारंटी नहीं है. पहली बार नोटिस में चीन के टीके के क्लीनिकल परीक्षण का जिक्र है. इसमें बताया गया है कि अब तक 6.5 करोड़ चीन के लोगों को देश के भीतर टीके लगाए गए हैं.

नोटिस में बताया गया है कि मौजूदा क्लीनिकल परीक्षण के आंकड़ों के अनुसार टीका लेने के बाद खुजली, सूजन, बुखार, सिर में दर्द, डायरिया समेत अन्य विपरीत प्रभाव सामने आए हैं. चीन मेंं विदेशी पत्रकारों को टीका लगवाने की पेशकश कोई आम बात नहीं है. हाल ही में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि विदेशी मीडिया के लिए चीन किसी ‘जेल’ से कम नहीं है.

विदेशी पत्रकारों के लिए ‘जेल’ बना चीन

‘फॉरेन कॉरसपोंडेंट्स क्लब ऑफ चाइना’ की रिपोर्ट के अनुसार चीन ने 2020 में 18 पत्रकारों को निर्वासित किया. रिपोर्ट के मुताबिक एफसीसीसी ने कहा कि चीनी अधिकारियों ने कोविड-19 महामारी पर रिपोर्टिंग को सीमित किया और पत्रकारों पर नजर रखते हुए उन्हें निर्वासित किया.

रिपोर्ट के मुताबिक चीनी अधिकारियों ने 2020 में विदेशी पत्रकारों के काम को विफल करने के लिए प्रयास तेज कर दिए. राज्य के सभी अंगों और कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए लाई गई निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल पत्रकारों, उनके चीनी सहयोगियों को तंग करने और धमकाने के लिए किया गया. साथ ही उन लोगों को भी परेशान किया गया जिनका इंटरव्यू विदेशी मीडिया लेना चाहती थी.

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