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किसानों के साथ बातचीत में ‘कीमतों’ को लेकर वादा कर सकती है केंद्र सरकार, 10 बातें

कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसानों के साथ केंद्र सरकार बातचीत कर रही है. उम्‍मीद है कि बातचीत में सार्थक हल निकलने से मामले में गतिरोध समाप्‍त होगा.

नई दिल्ली: Farmers Law: कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसानों के साथ केंद्र सरकार बातचीत कर रही है. उम्‍मीद है कि बातचीत में सार्थक हल निकलने से मामले में गतिरोध समाप्‍त होगा. आंदोलन कर रहे किसानों ने दोटूक लहजे में कहा है कि सरकार जब तक तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी, वे देश की राजधानी से नहीं हटेंगे.आंदोलन के चलते हजारों के संख्‍या में किसानों ने देश की राजधानी में डेरा डाल रहा है. इससे पहले पंजाब के सीएम कैप्‍टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah)से भेंट की. पंजाब के सीएम ने दोनों पक्षों से बातचीत के जरिये मामले का हल निकालने की अपील की है.

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
बैठक के पहले किसानों ने कहा कि केवल न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) को कानूनी स्‍वरूप देने से उनका मकसद हल नहीं होगा. वे तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने से कम किसी भी बात के लिए तैयार नहीं हैं.
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने किसान आंदोलन के समर्थन और उनपर किए गए सांप्रदायिक कटाक्षों के विरोध में अपना प्रतिष्ठित पद्म विभूषण अवॉर्ड लौटा दिया है. उन्होंने इसके लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा है.
किसान संगठनों की सरकार के साथ बैठक में किसानों ने सरकार की ओर से दिए गए लंच के ऑफर को मना कर दिया और अपने साथ लाया गया खाना ही खाया है. किसानों ने बताया कि अभी लंच ब्रेक हुआ है. सरकार ने उन्हें खाने का ऑफर दिया था लेकिन उन्होंने मना कर दिया और अपने साथ ले जाए गए लंगर के खाने को ही खाया.
अमरिंदर सिंह ने अमित शाह के साथ आज मीटिंग खत्म करने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि ‘केंद्र सरकार और किसानों के बीच में बातचीत चल रही है, इसमें मेरी ओर से कुछ हल करने जैसा नहीं है. मैंने गृहमंत्री के साथ अपनी मीटिंग में अपना पक्ष रखा और कहा कि इस मुद्दे का जल्द से जल्द हल निकालें क्योंकि इससे एक तो अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, वहीं इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा है.’
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किसानों से सरकार की मीटिंग के पहले एक ट्वीट में कहा है कि सरकार अगर किसानों की बात नहीं मानती है तो यह विश्वासघात से कम नहीं होगा.
कामगार संघटना संयुक्त कृति समिति भी मुंबई में किसानों के समर्थन में प्रदर्शन कर रही है. मुम्बई में गुरुवार को भारत माता सिनेमा के पास अलग अलग यूनियन के मजदूरों ने इकट्ठा होकर नारेबाजी की. मोदी के भ्रमजाल के आरोप में यूनियन नेताओँ का कहना है कि नरेंद्र मोदी खुद सबसे बड़े भ्रमजाल हैं. वो किसान कानून के जरिये सबकुछ निजी हाथों में देकर मजदूरों को भी बेकार कर रहे हैं.
प्रदर्शन कर रहे किसानों के नेताओं ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर सरकार से नये कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने और किसानों की एकता को भंग करने के लिए ‘विभाजनकारी एजेंडे में नहीं शामिल होने’ की मांग की. आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चो को-ऑर्डिनेशन कमिटी ने पत्र में कहा है, ‘ हम सरकार से किसान आंदोलन के संबंध में किसी भी विभाजनकारी एजेंडे में शामिल नहीं होने की मांग करते हैं क्योंकि यह आंदोलन इस वक्त अपनी मांगों पर एकजुट है.
इससे पहले किसानों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि तीनों किसान कानूनों को रद्द नहीं किया गया तो वे दिल्‍ली के रास्‍ते ब्‍लॉक कर देंगे.किसानों ने कहा है कि सरकार विशेष सत्र बुलाकर इन कानूनों को रद्द कर दे अन्यथा किसान दिल्ली ब्लॉक कर देंगे.
मंगलवार की बैठक में किसानों से चर्चा के दौरान सरकार ने कृषि कानूनों पर चर्चा के लिए समिति बनाने का सुझाव रखा, लेकिन किसानों ने इस प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया.
मंगलवार की बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान संगठनों से कहा थाकि 4 से 5 नाम अपने संगठन से दें. एक समिति बना देते है जिसमें सरकार के लोग भी होंगे, कृषि एक्सपर्ट भी होंगे, नए कृषि कानून पर चर्चा करेंगे. किसानों ने सरकार के इस प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया था.

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