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कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान, 10 प्वाइंट में जानें कैसे होगा टीकाकरण

नई दिल्ली। देश में कोरोना वैक्सीन का टीकाकरण 12 से 14 दिनों में शुरू होने वाला है। इसके लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर व्यवस्था की है। इसके तहत कोविन ऐप लांच किया है। इसे करोड़ों लोगों को टीका लगाने के लिए विकसित किया गया है।  कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए इसके जरिए 12 भाषाओं में एसएमएस और आधार कार्ड के प्रमाणकरण के जरिए टीकाकरण की पुष्टिकरण होगी। महामारी के बीच बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान का मैनेजमेंट करने और स्केल करने के लिए छोटे पैमाने पर कोविड वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क विकसित करने कोविन ऐप का इस्तेमाल होगा और इसके इकोसिस्टम का उपयोग किया जाएगा।

भारत ने आपातकालीन उपयोग के लिए दो टीके के इस्तेमाल की मंजूरी दी है – इसमें सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और की ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशिल्ड और भारत बायोटेक की कोवाक्सिन शामिल है। सरकार ने टीकाकरण में उन समूहों को प्राथमिकता दी है, जो पहले वैक्सीन प्राप्त करेंगे, जिसमें डॉक्टर, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, पुलिस, सैन्य कर्मी और अन्य लोग शामिल हैं जो सीधे कोरोना से लड़ने में लगे हुए हैं। आइये 10 प्वाइंट में जानें कि देश में टीकाकरण का अभियान किस प्रकार चलाया जाएगा।

3. टीकाकरण में लगे लोगों को टीका लगाने के लिए मार्गदर्शन करने के लिए आम लोगों को  12 भाषाओं में एसएमएस भेजे जाएंगे। इसके जरिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता टीका लगा सकेंगे। सभी खुराक दिए जाने के बाद एक क्यूआर कोड आधारित टीकाकरण प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा और लोग इसे अपने मोबाइल फोन में संग्रहीत कर सकते हैं।

4. सरकार के दस्तावेज संग्रहण ऐप डीजीलॉकर (DigiLocker) को क्यूआर कोड आधारित प्रमाणपत्र को संग्रहीत करने और लाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए एक 24 घंटे वाली हेल्पलाइन होगी।

5. अभी के लिए जनता स्वयं को टीकाकरण के लिए पंजीकृत नहीं कर सकती है क्योंकि इसके लिए सिर्फ अधिकारियों की पहुंच होगी। कोविन ऐप में  में 75 लाख स्वास्थ्य अधिकारियों का डेटा है, जो टीकाकरण करने के लिए पहली कतार में होंगे। एक बार जब ऐप चल रहा है तो इसके चार मॉड्यूल होंगे – यूजर व्यवस्थापक मॉड्यूल, लाभार्थी पंजीकरण, टीकाकरण और लाभार्थी पावती (एकनॉलेजमेंट) और वर्तमान स्थिति।

6. ऐप लॉन्च होने के बाद कोविन ऐप लोगों को टीकाकरण के पंजीकरण के लिए तीन विकल्प देगा – स्व पंजीकरण, व्यक्तिगत पंजीकरण (एक अधिकारी डेटा अपलोड करके मदद करेगा) और बल्क अपलोड। इस प्रक्रिया के सटीक लॉजिस्टिक्स की घोषणा अभी तक नहीं की गई है। यह संभावना है कि सरकार उन शिविरों को लगा सकती है, जहां लोग जा सकते हैं और अधिकारी उन्हें वैक्सीन के लिए पंजीकृत करवाएंगे। विड टास्क फोर्स की सदस्य डॉ सुनीला गर्ग ने कहा कि 50 साल से ऊपर के लोगों के डेटा के लिए मतदाता सूची की मदद ली जाएगी और उस डेटा को कोविन में फीड किया जाएगा। उसके बाद इसे जनता के लिए खोला जाएगा। यदि कोई व्यक्ति पाता है कि उसका नाम नहीं है तो वे जिला या ब्लॉक अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं और अपना नाम पंजीकृत करवा सकते हैं। वे स्व पंजीकरण भी कर सकते हैं। 50 से नीचे के लोग जिन्हें हृदय रोग या कैंसर है, वे अपना चिकित्सा प्रमाणपत्र सिस्टम में अपलोड कर सकते हैं।

8. सरकार ने कहा कि टीकाकरण के विभिन्न चरणों के डेवलपमेंट के लिए क्षेत्र में सॉफ्टवेयर का टेस्ट करने के लिए कई ड्राइ रन बनाए गए हैं। देश के 700 जिलों में 90,000 से अधिक लोगों को सॉफ्टवेयर का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

9. सरकार ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और अन्य मेडिकल फ्रंटलाइन श्रमिकों के डेटा को प्लेटफार्म पर अपलोड किया गया है। उन्हें खुद को पंजीकृत करने की आवश्यकता नहीं है।

10 . टीकाकरण के लिए जनसंख्या में प्राथमिकता वाले समूहों के लिए स्वचालित रूप से सिस्टम आवंटन को स्लॉट किया जाएगा। जिला मजिस्ट्रेट उन तारीखों को तय कर सकते हैं,  जिन पर टीकाकरण सत्र आयोजित किया जा सकता है।

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