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अमेरिकन्स फर्स्ट:एस्ट्राजेनेका कोरोना वैक्सीन की करोड़ो डोज दबाए बैठा है अमेरिका , न जरूरतमंद देशों को दे रहा न खुद कर रहा इस्तेमाल

अमेरिका एस्ट्राजेनेका कोरोना वैक्सीन की करोड़ों डोज दबाए बैठा है। क्लीनिकल टेस्ट के नतीजे न आने की वजह से अमेरिका न खुद इन टीकों का इस्तेमाल कर रहा है और न उन जरूरतमंद देशों को दे रहा है, जो इस वैक्सीन मान्यता दे चुके हैं। बाइडेन प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, एस्ट्राजेनेका वैक्सीन व्हाइट हाउस और फेडरल हेल्थ ऑफिशियल के लिए बहस का अहम मुद्दा बन चुका है। कुछ लोगों का कहना है प्रशासन को तैयार वैक्सीन के डोज उन देशों में भेज देने चाहिए, जहां लोग बेसब्री से इसका इंतजार कर रहे हैं। जबकि कुछ इसके लिए तैयार नहीं हैं।

एस्ट्राजेनेका के स्पोकपर्सन गोंजालो वेना ने कहा कि ‘हमें लगता है कि दूसरी सरकारें भी अमेरिकी सरकार के पास इस वैक्सीन को डोनेट करने की बात लेकर पहुंच चुकी हैं, इसलिए हमने अमेरिकी सरकार से कहा है कि ऐसे मामलों पर सोच समझकर फैसला करें।’

अमेरिकी प्रेसिडेंट ने यूरोपीय यूनियन को वैक्सीन भेजने से इनकार किया
वैक्सीन स्टॉक से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि करीब 30 मिलियन वैक्सीन की डोज वेस्ट चेस्टर, ओहियो में तैयार रखे हैं। मैरीलैंड की एक कंपनी एमर्जेंट बायो सॉल्युशंस, जिसे एस्ट्राजेनेका ने संयुक्त राज्य में वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग के लिए अनुबंधित किया है, उसने भी बाल्टिमोर में 1 करोड़ से अधिक डोज के लिए पर्याप्त वैक्सीन बना ली है। हालांकि, कंपनी के स्पोकपर्सन के मुताबिक एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को 70 से अधिक देशों में मान्यता मिल चुकी है, लेकिन अमेरिकन क्लिनिकल ट्रायल ने अब तक रिजल्ट नहीं बताए हैं और कंपनी ने अभी तक फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन में इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन के लिए अप्लाई नहीं किया है। एस्ट्राजेनेका ने बाइडेन प्रशासन से यूरोपीय यूनियन को वैक्सीन की अमेरिकी डोज भेजने के बारे में कहा है, जिसके लिए प्रशासन ने इनकार कर दिया है।

बाइडेन का दावा मई के अंत तक अमेरिकी लोगों के लिए पर्याप्त डोज तैयार होंगे

अमेरिका से बाहर दूसरे देशों में वैक्सीन भेजने पर व्हाइट हाउस अगले कुछ हफ्तों में फैसला ले सकता है। हालांकि ब्राजील को वैक्सीन देने के मामले में अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। संभवतः बाइडेन प्रशासन अमेरिका में वैक्सीन के डोज पूरे होने को लेकर चिंतित हैं क्योंकि वैक्सीन का उत्पादन बेहद पेचीदा काम है। दरअसल, प्रेसिडेंट बाइडेन यह दावा कर चुके हैं कि मई के अंत तक हर अमेरिकी वयस्क के लिए पर्याप्त वैक्सीन की डोज होंगी।

ट्रम्प ने वैक्सीन के लिए एस्ट्राजेनेका को 1.2 बिलियन डॉलर देने का वादा किया था
पिछले साल मई में ट्रम्प प्रशासन ने कोरोना वैक्सीन के लिए एस्ट्राजेनेका को 1.2 बिलियन डॉलर देने का वादा किया था और इसके प्रभावी साबित होने पर 300 मिलियन डोज की सप्लाई के बारे में कहा था। अमेरिकी रेगुलेटर और एस्ट्राजेनेका के बीच बातचीत कुछ बनी नहीं जिसके चलते दोनों के रिश्तों में खटास आई और वैक्सीन का डेवलपमेंट धीमा हो गया। सात हफ्ते तक फाइनल ट्रायल नहीं हो सका। क्योंकि कंपनी अपने दो वॉलेंटियर पर वैक्सीन के ट्रायल का डाटा नहीं दे पाई थी।

दूसरे देशों के तभी वैक्सीन भेजी जाएगी जब अमेरिकी लोगों के लिए पर्याप्त डोज होंगे
कंपनी को फिलहाल एक और डर सता रहा है, क्योंकि डेनमार्क, नॉर्वे और आइलैंड में स्वास्थ्य अधिकारियों ने वैक्सीन के ट्रायल के वक्त कुछ लोगों में ब्लड क्लॉट के चलते वैक्सीन यूज को सस्पेंड कर दिया है। हालांकि इस पर यूरोपीय अधिकारियों और कंपनी का कहना है कि इस बात के कोई सबूत नहीं है। राष्ट्रपति बाइडेन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर हमारे पास वैक्सीन की पर्याप्त डोज होंगी, तभी हम उसे पूरी दुनिया में भेजेंगे। लेकिन अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन समय पर तैयार नहीं
अमेरिकी और यूरोपियन अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका में वैक्सीन बनाने के लिए आथोराइज जॉनसन एंड जॉनसन ने अमेरिकी प्रशासन से यूरोपियन यूनियन को वैक्सीन देने के लिए कहा। क्योंकि वह समय पर अपनी वैक्सीन के पर्याप्त डोज तैयार नहीं कर पाई लेकिन बाइडेन प्रशासन ने इसे खारिज कर दिया।

इटली ने रोका ऑस्ट्रेलिया का वैक्सीन शिपमेंट
यूरोपियन यूनियन को वैक्सीन नेशनलिज्म को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। पिछले हफ्ते यह मामला और बढ़ गया जब इटली ने ऑस्ट्रेलिया जाने वाली वैक्सीन का शिपमेंट रोक दिया। वहीं, दूसरी ओर यूरोपियन यूनियन ने हाल के सप्ताहों में कई देशों में करीब 34 मिलियन कोरोना वायरस वैक्सीन भेजी है, जबकि उन्हें खुद वैक्सीन की शॉर्टेज झेलनी पड़ रही है।

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