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Rajasthan Assembly में गूंजा फोन टैपिंग का मुद्दा, सरकार ने माना, हुई थी फोन टैपिंग

Jaipur: राजस्थान (Rajasthan News) की सियासत में फोन टैपिंग पर एक बार फिर बवाल हो गया है. राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) पर आए सियासी संकट के वक्त एक फोन रिकॉर्डिंग सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी थी. अब विधानसभा (Rajasthan Assembly) में ये स्वीकार किया गया है कि हां…फोन टैपिंग हुई है.

राजस्थान में सियासी संकट के दौरान कथित तौर पर किए गए फोन टैपिंक की तस्दीक हो गई है और टैपिंग (Phone Tapping) अब कथित नहीं रह गई. सरकार ने विधानसभा में ये माना है कि हां फोन टैपिंग हुई थी, लेकिन ये नहीं बताया कि किस किस की फोन टैपिंग हुई.

सियासी संकट के वक्त एक फोन रिकॉर्डिंग सियासी गलियारों में चली थी.
फोन रिकॉर्डिंग में राजस्थान सरकार गिराने की साजिशों के आरोप लगे.
दावा किया गया कि एक केंद्रीय मंत्री राजस्थान के एक विधायक से बात कर रहे हैं.
लेकिन सवाल उठे कि फोन रिकॉर्डिंग आई कहां से?
क्या राजस्थान सरकार विधायकों के फोन टैपिंग कर रही है?
उस वक्त केंद्र सरकार ने भी राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी.
बीजेपी विधायक कालीचरण सराफ ने 8 महीने पहले विधानसभा में सवाल पूछा था.
अब इस बारे में विधानसभा की वेबसाइट पर जानकारी दी गई है.

सरकार के इस कबूलनामे के बाद सियासत तेज हो गई है. बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने प्रेस कांफ्रेंस कर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

सरकार पर आरोपों की बोछार होने लगी. तो डैमेज कंट्रोल के लिए पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) को आगे आना पड़ा. डोटासरा ने कहा कि कालीचरण सराफ (Kalicharan Saraf) ने फोन टैपिंग की प्रक्रिया पूछी थी. उसी प्रक्रिया की जानकारी दी हमने दे दी. किसी भी विधायक और मंत्री के फोन टैप नहीं हुए हैं.

सियासी संकट के बीच जब फोन टैपिंग के मामले में सियासत हुई. तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कहा था कि ये रिकॉर्डिंग अगर गलत साबित हुई तो वे राजनीति छोड़ देंगे. ऐसे में करीब एक साल बाद राजस्थान की सियासत टैपिंक के कबूलनामे पर एक बार फिर गरमा गई है.

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