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MP निकाय चुनाव में होगी इतने माह की देरी, शिवराज सरकार के मंत्री ने दिया बड़ा बयान

भोपालः मध्य प्रदेश में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव के लिए मेयर और अध्यक्ष पदों के लिए की गई आरक्षण प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने रोक लगा दी. ऐसे में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दायर करने की बात कही है. वही इस मुद्दे पर प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि 1995 से जो आरक्षण हो रहा है, उसी आधार पर इस बार भी आरक्षण हुआ था. इसलिए राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्णय के बाद सभी पक्षों पर विचार कर रही है.

अब चुनाव में 2 से 3 महीने का समय लग जाएगा
मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट ने जो फैसला सुनाया है उसकी कॉपी अब तक सरकार को नहीं मिली है. लेकिन हाईकोर्ट से स्टे मिला है तो अब निकाय चुनाव में 2 से 3 महीने का सयम और लग जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार कोर्ट के आदेश के मद्देनजर हर पहलू पर विचार कर रही है. कोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जा रहा है. जो भी उचित होगा सरकार उसी हिसाब से आगे कदम उठाएगी.

इंदौर खंडपीठ ने भी लगाया स्टे 
हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के बाद इंदौर खंडपीठ ने भी निकाय चुनाव के आरक्षण को लेकर स्टे जारी कर दिया है. इंदौर हाईकोर्ट में आरक्षण को लेकर एक याचिका लगाई गई थी. उस याचिका पर आज सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद इंदौर खंडपीठ ने आरक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए शासन को नोटिस जारी किया है. अब इंदौर खंडपीठ में इस मामले में 15 दिन बाद फिर से सुनवाई होगी.

निकाय चुनाव में आरक्षण व्यवस्था को दी गई थी चुनौती 
दरअसल, हाईकोर्ट में 10 दिसंबर 2020 निकाय चुनाव के लिए की गई आरक्षण की व्यवस्था को ये कहते हुए चुनौती दी गई थी कि इसमें अध्यक्ष पद का आरक्षण करने में रोटेशन पद्धति का पालन नहीं किया गया. याचिका में नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष पद के लिए हुए आरक्षण को निरस्त करने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता मानवर्धन सिंह तोमर का कहना था कि अधिकांश नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष पद लंबे समय से एक ही वर्ग के लिए आरक्षित किए जा रहे हैं.  इस वजह से दूसरे वर्ग के लोगों को अध्यक्ष के पद पर प्रतिनिधित्व करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है. याचिकाकर्ता ने प्रदेश की 79 नगर पालिका और नगर परिषद के अलावा 2 मेयर सीट का हवाला भी याचिका में दिया था. जिसके बाद इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच ने निकाय चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया पर रोक लगा दी.

सरकार को रखना है अपना पक्ष 
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब अब इस याचिका पर सरकार को अपना विस्तृत पक्ष रखना है. इस मामले की अगली सुनवाई अब अप्रैल के महीने में होगी. इससे पहले हाईकोर्ट ने ग्वालियर जिले की डबरा नगर पालिका और दतिया जिले की इंदरगढ़ नगर परिषद के अध्यक्ष पद के आरक्षण पर रोक लगा दी थी.

इस तरह फंसा आरक्षण का मामला 
दरअसल, मध्य प्रदेश उज्जैन, मुरैना नगर निगम के लिए आरक्षित किए गए महापौर के पद को लेकर मामला फंसा है. प्रत्याशियों के आरक्षण की रोटेशन प्रक्रिया के तहत एक ही वर्ग के प्रत्याशियों के लिए मेयर या अध्यक्ष का पद दो बार से ज्यादा आरक्षित नहीं किया जा सकता. लेकिन उज्जैन, मुरैना नगर निगम के साथ 79 नगर पालिका और नगर परिषदों में मेयर और अध्यक्ष का पद तीसरी बार एक ही वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया. यही वजह रही कि निकाय चुनाव की इस आरक्षण प्रक्रिया के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई. जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद रोक लगा दी.

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