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गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा बोले- मध्य प्रदेश सरकार ने नहीं जारी की है कोई नई ट्रांसफर पॉलिसी

भोपाल: मध्य प्रदेश में नई तबादला नीति 2021 (New Transfer Policy 2021) का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है. इसे मंजूरी के लिए जल्द ही शिवराज कैबिनेट में रखा जाएगा. इस ड्राफ्ट में ट्रांसफर नियमों में कुछ अहम बदलाव प्रस्तावित हैं. इसके अलावा कुछ विभागों को अपनी ट्रांसफर पॉलिसी खुद बनाने की छूट देने का भी जिक्र ड्राफ्ट में किया गया है. मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के तबादले पर लगा प्रतिबंध 1 अप्रैल से हट रहा है. न्यू ट्रांसफर पॉलिसी भी इसी दिन से लागू हो जाएगी.

नई पॉलिसी ऑल इंडिया सर्विसेज के अफसरों पर नहीं लागू होगी
न्यू ट्रांसफर पॉलिसी ड्राफ्ट के मुताबिक यदि किसी क्लास वन अफसर का ट्रांसफर द्वेष भावना से किया गया है तो वह इसकी शिकायत मुख्य सचिव या सीधे मुख्यमंत्री को कर सकेगा. ऐसी शिकायतों का संज्ञान सीधे मुख्यमंत्री लेंगे और निराकरण भी वही करेंगे. हालांकि न्यू ट्रांसफर पॉलिसी के नियम ऑल इंडिया सर्विसेज (All India Services) के ऑफिसर्स पर लागू नहीं होंगे. जिलों के प्रभारी मंत्री किसी भी कर्मचारी का तबादला एक साल में दो बार नहीं कर सकेंगे.

कर्मचारियों का साल में एक बार ही ट्रांसफर कर सकेंगे प्रभारी मंत्री
जिन कर्मचारियों के तबादले मार्च 2020 से मार्च 2021 के बीच हुए हैं, जिले के प्रभारी मंत्री उनका तबादला सीधे नहीं कर सकेंगे. उन्हें इसके लिए मुख्यमंत्री से स्वीकृति लेनी होगी. सीएम की स्वीकृति के बाद ही जिले के प्रभारी मंत्री ऐसे अधिकारियों- कर्मचारियों का तबादला कर सकेंगे. न्यू ट्रांसफर पॉलिसी में पुलिस व फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को भी शामिल किया गया है. हालांकि डिप्टी एसपी रैंक से नीचे वाले पुलिस​कर्मियों का तबादला पुलिस स्थापना बोर्ड ही करेगा, जिसमें प्रभारी मंत्री की स्वीकृति आवश्यक होगी.

नई तबादला नीति में पुलिस विभाग है शामिल, शिक्षा विभाग बाहर
वहीं डिप्टी एसपी और उससे ऊपर की रैंक वाले अफसरों की ट्रांसफर फाइल प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बिना मुख्य सचिव व मुख्यमंत्री को नहीं भेजी जा सकेगी. शिक्षा विभाग को न्यू ट्रांसफर पॉलिसी से बाहर रखा गया है. ऐसा माना जा रहा है कि राज्य सरकार कुछ शर्तों के साथ स्कूल शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा विभाग को अपनी खुद की ट्रांसफर पॉलिसी बनाने की छूट देगा. न्यू ट्रांसफर पॉलिसी को शिवराज कैबिनेट की मंजूरी मिलने के साथ ही जिलों का प्रभार भी मंत्रियों को आवंटित कर दिया जाएगा. बीते 8 महीने से मंत्रियों को जिलों का प्रभार अटका हुआ है.

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