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क्वाड देशों के प्रमुखों की ऐतिहासिक बैठक आज, पीएम मोदी, सुगा, बाइडन व मॉरीसन तय करेंगे भावी एजेंडा

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। क्वाड देशों यानी जापान, आस्ट्रेलिया, अमेरिका और भारत के प्रमुखों की ऐतिहासिक बैठक को लेकर भारत सरकार की तैयारियां तकरीबन पूरी हैं। लेकिन इसके साथ ही विदेश मंत्रालय का एक पूरा प्रकोष्ठ ब्रिक्स देशों यानी ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के तहत होने वाली कई बैठकों की तैयारियों में भी कोई कोताही नहीं कर रहा। भारतीय अधिकारी ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि जून-जुलाई से इस संगठन के तहत विदेश, रक्षा, उद्योग और वित्त मंत्रियों के बीच की बैठक को लेकर अंतिम रूप दिया जा सके। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इस संगठन के प्रमुखों की बैठक भी भारत में ही आयोजित होने की तैयारी की जा रही है।

जानें क्वाड की यात्रा-

2004- पहली बार सुनामी प्रबंधन को लेकर चारों देशों ने मिलाए हाथ

2007- पहली बार चारों देशों के बीच रणनीतिक बैठक

2017- एक दशक बाद हुई चारों के विदेश मंत्रालयों की बैठक

2019- पहली बार हुई विदेश मंत्रियों की बैठक

2021- पहली बार क्वाड देशों के प्रमुखों की बैठक

वर्ष 2017 में क्वाड के चारों देशों के बीच नए सिरे से शुरू किया गया विमर्श 

क्वाड के प्रमुखों यानी पीएम नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, आस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरीसन और जापान के पीएम योशिहिदे सुगा के बीच पहली बैठक के बारे में विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि निश्चत तौर पर वर्ष 2004 में जो पहल शुरू हुई थी, उसके अब ज्यादा ठोस रूप लेने का समय आ गया है। लेकिन यह भी सच है कि जिस उद्देश्य से 16-17 वर्ष पहले इसकी परिकल्पना की गई थी, उन उद्देश्यों में भी अब बदलाव आ गया है। वैश्विक परिदृश्य बदल गया है। तब भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया ने सुनामी से बचाव व राहत कार्य को निश्चित दिशा देने के लिए क्वाड का गठन किया था। वर्ष 2017 में क्वाड के चारों देशों के बीच नए सिरे से विमर्श शुरू किया गया, जो पिछले एक वर्ष के भीतर ज्यादा गति पकड़ चुका है। नवंबर 2020 और फरवरी 2021 में दो बार चारों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हो चुकी है। चारों देशों ने क्वाड के लिए अपने-अपने शेरपा नियुक्त कर रखे हैं।

 

जहां तक शुक्रवार को होने वाली बैठक में भारत के रुख का सवाल है तो यह बहुत हद तक पीएम मोदी की तरफ से शांग्रीला डायलॉग (वर्ष 2018) में दिए गए भाषण के मुताबिक ही होगा। मोदी ने तब हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत की नीति बताते हुए सागर (सिक्युरिटी एंड ग्रोथ फार आल इन द रीजन) का नारा दिया था। भारत हर देश के लिए समान अवसर बनाने की नीति के तहत काम करेगा। सूत्रों के मुताबिक अभी तक क्वाड की बैठक बगैर किसी ठोस एजेंडे के हुआ करती थी। लेकिन इस बैठक के बाद एक ठोस खाका तैयार हो जाएगा।

 

भारत के साथ रिश्तों को और मजबूत बनाना उनकी प्राथमिकता में: चीन

क्वाड के साथ ही ब्रिक्स की तैयारियों के संदर्भ में पूछे जाने पर सूत्रों का कहना है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस संदर्भ में हाल ही में भारत की नीति साफ की है कि नए वैश्विक माहौल में एक शक्ति का नहीं, बल्कि कई शक्ति केंद्रों का उद्भव होगा। भारत भी एक शक्ति होगा और उसे दूसरे केंद्रों के साथ तालमेल बिठाना होगा। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि क्वाड बैठक का एलान करने के साथ ही अमेरिका ने कहा है कि उसके विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान अपने चीन के समकक्षों के साथ 18 मार्च, 2020 को बैठक करेंगे। चीन की सरकार भी इस बैठक को लेकर काफी उत्साहित है। दूसरी तरफ चीन के विदेश मंत्री ने तीन दिन पहले ही कहा है कि भारत के साथ रिश्तों को और मजबूत बनाना उनकी प्राथमिकता में है। हाल ही में ब्रिक्स देशों की आगामी बैठकों को लेकर बुलाई गई शेरपाओं (सम्मलेन को लेकर फैसला करने वाले अधिकारी) की बैठक में भी चीन का रवैया काफी सकारात्मक रहा है।

इस तालमेल के बावजूद शुक्रवार की बैठक में भारतीय पक्ष मुख्य तौर पर दूसरे देशों के साथ मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी साझेदारी को और मजबूत बनाने की पहल करेगा। बैठक में निश्चित तौर पर हिंद प्रशांत क्षेत्र की स्थिति एजेंडे में सबसे ऊपर होगी, लेकिन दूसरे वैश्विक मुद्दे, कोरोना के बाद के विश्व में औद्योगिक सप्लाई चेन की स्थिति, क्रिटिकल तकनीक (जैसे 5जी आदि) में सहयोग, समुद्री व पर्यावरण सुरक्षा पर भी एक-एक करके बात होगी। कोरोना वैक्सीन को पूरी दुनिया में विस्तार देने में चारों देश किस तरह से सहयोग कर सकते हैं, इस पर भी चर्चा होगी।

 

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