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 म्यांमार: आज 7 और प्रदर्शनकारियों ने जान गंवाई, अब तक 60 की मौत, सेना पर लोगों के खिलाफ ‘युद्ध की रणनीति’ अपनाने का आरोप

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। म्यांमार में लोग सैन्य शासन के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार को भी म्यांमार के अधिकांश बड़े शहरों में सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन लोगों की मांग है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को रिहा किया जाए, जिनमें देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू ची भी शामिल हैं।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ चश्मदीदों और म्यांमार के स्थानीय मीडिया का हवाला देते हुए लिखा है कि गुरुवार को केंद्रीय म्यांमार में प्रदर्शन के दौरान कम से कम सात प्रदर्शनकारियों की मौत हुई। इस बीच, मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने म्यांमार की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सैन्य शासक अब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ युद्ध की रणनीतियां अपना रहे हैं।

अब तक 60 प्रदर्शनकारियों की मौत, 2 हजार से ज्यादा लोग बंधक 
म्यांमार के एक स्थानीय संगठन के अनुसार अब तक 60 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और 2000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षा बलों ने बंधक बना लिया है। एक फरवरी को म्यांमार के सैन्य शासकों ने तख्तापलट करने के बाद, आंग सान सू ची को गिरफ्तार कर लिया था।

म्यांमार की सेना ने सू ची पर लगाया अवैध ढंग से पैसा लेने का आरोप
म्यांमार के सैन्य शासकों ने अपदस्थ नेता आंग सान सू ची पर सरकार में रहते हुए, अवैध तरीके से कुछ गोल्ड और 6 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब चार करोड़ 36 लाख रुपये) स्वीकार करने का आरोप लगाया है। म्यांमार की सेना द्वारा सू ची पर लगाया गया यह अब तक का सबसे गंभीर आरोप है। सेना ने यह दावा भी किया है कि उन्होंने इस सूचना की पुष्टि की है कि सू ची ने ये पैसे स्वीकार किये थे।

सेना ने आरोपों के साथ कोई सबूत पेश नहीं किया
1 फरवरी को म्यांमार के सैन्य शासकों ने देश के लोकतांत्रिक नेतृत्व को उखाड़ फेंकने के साथ ही आंग सान सू ची को भी गिरफ्तार कर लिया था। गुरुवार को कुछ सैन्य शासकों ने इस बारे में एक प्रेस वार्ता की, जिसमें उन्होंने सू ची पर यह आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों के साथ किसी तरह का सबूत उन्होंने पेश नहीं किया।

UN की सुरक्षा परिषद ने की हिंसा की आलोचना
बुधवार को संयुक्त राष्ट्र (UN) की सुरक्षा परिषद ने प्रदर्शनकारियों के साथ हो रही हिंसा की आलोचना की थी और संस्था ने म्यांमार की सेना से संयम बरतने की अपील की थी। लेकिन, सुरक्षा परिषद म्यांमार की सेना पर खास दबाव नहीं बना पाई, क्योंकि चीन और रूस का इस मामले में नजरिया अलग रहा है।

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