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Myanmar coup : म्‍यांमार में तख्तापलट के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने में विफल रही सुरक्षा परिषद

नेपिता, एजेंसियां। म्यांमार में तख्तापलट के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद विफल रही है। हालांकि उसने सेना को संयम बरतने की नसीहत देने के साथ ही भविष्य में कडे़ कदम उठाने की चेतावनी दी है। खास बात यह है कि बयान में किन-किन बिंदुओं को शामिल किया जाए, इसको लेकर बातचीत जारी रहेगी। चीन, रूस, भारत और वियतनाम ब्रिटेन द्वारा लाए गए मसौदे पर संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसमें तख्तापलट और भविष्य में कार्रवाई की धमकी को हटाने की बात कही गई है।

मीडिया की आवाज दबाने का प्रयास

आंदोलन की स्वतंत्र रिपोर्टिग करने वाले समाचार पत्रों पर भी म्यांमार की सेना ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में मंगलवार को कामायुत मीडिया के कार्यालयों पर छापा मारने के साथ ही इसके सह संस्थापक और प्रधान संपादक को गिरफ्तार कर लिया। सेना ने ऑनलाइन न्यूज सर्विस मिज्जिमा के कार्यालयों पर भी छापे मारे। बता दें कि इससे पहले सेना पांच स्थानीय मीडिया संगठनों, मिज्जिमा, डीवीबी, खिट थिट मीडिया, म्यांमार नॉउ और 7 डेज न्यूज का लाइसेंस रद कर दिया है। ये सभी मीडिया संगठन विरोध-प्रदर्शनों को जोरदार कवरेज कर रहे थे। म्यांमार के सुरक्षा बलों ने बुधवार तड़के देश के सबसे बडे़ शहर यंगून के पड़ोस में स्थित हड़ताली रेलवे कर्मचारियों के घरों पर छापा मारा। इस दौरान कम से कम तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है ,लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

 

आठ से अधिक पुलिसकर्मी भागकर भारत में लिए शरण

म्यांमार में तख्तापलट के बाद से अब तक आठ से अधिक पुलिसकर्मी भागकर भारत के मिजोरम प्रांत आ चुके हैं। पड़ोसी देश ने इन्हें वापस लौटाने का अनुरोध किया है, लेकिन गृह मंत्रालय ने फिलहाल इस पर कोई जवाब नहीं दिया है। ऐसे ही एक पुलिसकर्मी था पेंग ने जब आपबीती सुनाई तो पता चला कि किस तरह वहां की सेना प्रदर्शनकारियों को कुचलने में लगी है। था पेंग ने कहा कि 27 फरवरी को उसे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए गोली चलाने का आदेश मिला था, लेकिन उसने मानने से इन्कार कर दिया। दूसरे दिन सुबह फिर उसे गोली चलाने का आदेश दिया गया, लेकिन उसने मानने से इन्कार कर दिया। इसके बाद वह तीन दिन पैदल चलकर भारत की सीमा में दाखिल हुआ। पेंग ने बताया कि उसके छह अन्य सहयोगियों ने भी प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इन्कार किया था।

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