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जलवायु संकट पर ग्राउंड रिपोर्ट:एक ही महीने में सर्दी और गर्मी के रिकॉर्ड बन रहे, पारा कभी माइनस 24 डिग्री तक गिरा, कभी 18 डिग्री तक चढ़ा

यूरोप में कोरोना के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन भी एक बड़ा संकट बना हुआ है। फरवरी में किसी न किसी दिन यूरोप के 100 से अधिक स्थानों पर तापमान सामान्य से 12 डिग्री अधिक रहा। इनमें से कई जगह पर सर्दी और गर्मी के नए रिकॉर्ड बने हैं। 14 फरवरी को जर्मनी के गाटिंजेन शहर में तापमान माइनस 24 डिग्री के आसपास था। 21 फरवरी को इसी शहर में तापमान 18 डिग्री पहुंच गया।

यानी महज 7 दिन में पारा 42 डिग्री चढ़ गया। हैम्बर्ग शहर में भी तापमान में 21 डिग्री की बढ़ोतरी देखी गई। इसी तरह, 11 फरवरी को ब्रिटेन के ब्रीमर में तापमान माइनस 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और 24 फरवरी को सैंतन डाउनहम में तापमान 18.4 डिग्री रहा।

ब्रिटेन के मौसम विभाग में नेशनल क्लाइमेट इंफॉर्मेशन सेंटर के प्रमुख डॉ. मार्क मैक्कार्थी कहते हैं कि हमारी सर्दियां बदल रही हैं। फरवरी में माइनस 20 डिग्री से नीचे पारा गिरना एक रिकॉर्ड है, लेकिन सर्दी में 18 डिग्री तापमान हमें डराता है। हालांकि बीते चार पांच साल से गर्मी बढ़ रही है।

सर्दी छोटी और गर्मी लंबी हो रही है। ब्रिटेन में मार्च से मई के बीच बसंत में धूप के घंटे दर्ज किए जा रहे हैं। बीते साल इस अवधि में 695.5 घंटे धूप रही, जो अब तक सर्वाधिक है। इससे पहले 1948 में ब्रिटेन ने 594.3 घंटे सनशाइन देखा था। 1929के बाद ब्रिटेन ने अब तक 9 बार 500 से अधिक घंटे वाला बसंत देखा है। 10 में से सात सबसे गर्म बसंत 2000 के बाद रहे हैं।

ब्रिटेन के मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने और अत्यअधिक बारिश का खतरा मंडरा रहा है। मार्च के पहले हफ्ते में ही दक्षिणी और पूर्व इंग्लैंड में तापमान दो अंकों में चला गया है। मौसम विज्ञानियों ने भविष्यवाणी की है कि 15 मार्च को लंदन का तापमान 15 डिग्री रह सकता है। इस बार गर्मी ने फरवरी में दस्तक ही दे दी है।

15 साल पहले जिन पौधों को पानी नहीं देना पड़ता था, अब जरूरी

फल, फूल और सब्जी उगाने वाले एड्रियन क्लॉगटन बदलते मौसम पर कहते हैं, ब्रिटेन में अब मूसलाधार और मानसून जैसी बारिश होती है। बारिश शुरू होने के बाद ऐसा लगता है कि यह अब कभी नहीं रुकेगी। अब हल्की बारिश वाले सूखे विंटर नहीं होते हैं। ग्रीष्मकाल सूखा होता है। इसलिए स्ट्राबेरी और रसभरी को पानी देना पड़ता है, जबकि 15 साल पहले गर्मियों में इनके पौधों को पानी की जरूरत नहीं पड़ती थी। अब स्ट्राबेरी गर्मियों में मर जाती है। मेंढक भी गायब हो रहे हैं। कुछ साल पहले तक हर नदी में मेंढक हुआ करते थे और उनकी टर्र-टर्र की आवाज हर वक्त गूंजती थी।

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