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NASA के मिशन मंगल से जुड़े एक और भारतीय:पर्सीवरेंस रोवर कंट्रोल कर रहे भारतीय प्रोफेसर, लंदन में एक बेडरूम का फ्लैट किराए पर लेकर बनाया कंट्रोल सेंटर

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ के पर्सीवरेंस रोवर का नियंत्रण एक भारतीय मूल के प्रोफेसर संजीव गुप्ता के हाथ में है। वे भी नासा के बजाय दक्षिण लंदन में एक बेडरूम के फ्लैट से इसे कंट्रोल कर रहे हैं। इस रोवर ने बीती 19 फरवरी को मंगल के जजीरो क्रेटर पर सफलतापूर्वक लैंड किया है।

लंदन के इंपीरियल कॉलेज में जियोलॉजी के विशेषज्ञ 55 साल के प्रोफेसर गुप्ता पर्सीवरेंस से जुड़े 400 वैज्ञानिकों की टीम में शामिल हैं। वे रोवर को मंगल पर नमूने जुटाने को ड्रिलिंग के लिए निर्देशित कर रहे हैं। ये सभी सैंपल साल 2027 में पृथ्वी पर आएंगे। इसके बाद उसके लाए नमूनों को गुप्ता और उनकी टीम ही जांचेगी और मंगल पर जीवन की संभावना तलाशेगी।

प्रोफेसर गुप्ता कहते हैं ‘मुझे कैलिफोर्निया के जेट प्रोपल्शन लैब में होना चाहिए था, जो इस कमरे से तीन गुना ज्यादा बड़ा है। वहां सैकड़ों वैज्ञानिक और इंजीनियर भी मौजूद रहते। लेकिन कोरोना की पाबंदियों के कारण ऐसा नहीं हो सका। जब मुझे लगा कि मैं कैलिफोर्निया नहीं जा पाऊंगा तो मैंने ल्यूशाम (लंदन) में ये फ्लैट किराए पर लेना तय किया। मैं नहीं चाहता था कि मेरी वजह से पत्नी और बच्चे परेशान हों।’ गुप्ता इन दिनों लगातार काम कर रहे हैं। क्योंकि मंगल पर दिन, पृथ्वी की तुलना में 40 मिनट ज्यादा लंबा होता है। इसके अलावा उनके साथी भी अलग-अलग जगहों पर हैं। वहां का टाइम जोन अलग है। सब से सामंजस्य बनाने के लिए उन्हें हर वक्त ऑनलाइन रहना पड़ता है।

यह सिलसिला शायद अब अगले छह सालों तक या उससे लंबा भी चल सकता है। क्योंकि उस समय तक रोवर पृथ्वी पर लौटेगा। बता दें गुप्ता का जन्म आगरा में हुआ था। जब वे 5 साल के थे तब परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए। उनके पिता रिसर्च साइंटिस्ट थे और चाहते थे कि गुप्ता मेडिसिन और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करें। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है।

5 कम्प्यूटर, दो बड़ी स्क्रीन लगाईं, जिससे नासा के वैज्ञानिकों से जुड़े रहें

प्रोफेसर गुप्ता ने फ्लैट किराए पर लेने के बाद इसे मिनी कंट्रोल सेंटर में तब्दील किया। 5 कम्प्यूटर लगाए और नासा के साइंटिस्ट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ने के लिए दो बड़ी स्क्रीन भी सेटअप कीं। इस कंट्रोल सेंटर के जरिए गुप्ता रोवर पर लगातार नजर रख रहे हैं। साथ ही यह भी तय कर रहे हैं कि कहां से सैंपल जुटाना है।

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