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बाइडेन की मुश्किल:सऊदी प्रिंस के खिलाफ कार्रवाई का रिस्क नहीं ले सकते US प्रेसिडेंट, चुनाव के साथ वादा भी खत्म हो गया

बात नवंबर 2020 की है। जो बाइडेन टेक्सॉस में एक रैली में भाषण दे रहे थे। तब उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प पर आरोप लगाया कि वे वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार की हत्या के मामले में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को बचा रहे हैं। बाइडेन ने ये भी कहा था कि अगर वे राष्ट्रपति बनते हैं तो सलमान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अब बाइडेन राष्ट्रपति हैं। उन्होंने एक रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया है कि पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के लिए प्रिंस सलमान ने मंजूरी दी थी। सऊदी अरब को संकेत देने के लिए बाइडेन ने प्रिंस सलमान की बजाए उनके पिता किंग सलमान से बातचीत की। लेकिन, CNN के एनालिसिस में एक्सपर्ट ने दावा किया है कि बाइडेन प्रिंस सलमान के खिलाफ एक्शन का जोखिम नहीं ले सकते।

वह तो सिर्फ चुनावी वादा था
CNN से बातचीत में बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन के एक अफसर ने कहा- एक रिपोर्ट से कुछ नहीं होता और इस रिपोर्ट को आधार बनाकर आप प्रिंस सलमान के खिलाफ कोई एक्शन भी नहीं ले सकते। वैसे भी इस रिपोर्ट में कुछ नया नहीं है। इसमें जो बातें कही गई हैं वे सभी एक साल से लोग जानते हैं और अमेरिकी अफसरों को भी हकीकत पता है। नया सिर्फ यह है कि इस रिपोर्ट को आधिकारिक तौर पर जारी किया गया है। आप कह सकते हैं कि अमेरिका ने ऑफिशियल स्टैंड क्लियर कर दिया है।

इस अफसर ने कहा कि बाइडेन ने जब चुनावी सभाओं में खशोगी हत्याकांड का जिक्र किया था, तब भी वे जानते थे कि राष्ट्रपति बनने के बाद उनके लिए कई कदम उठाना नामुमकिन जैसा होगा। इसलिए इसे चुनावी वादे से ज्यादा अहमियत मत दीजिए।

सऊदी से रिश्तों की अहमियत जानते हैं बाइडेन
बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन को बहुत अच्छे से मालूम है कि रियाद से उनके रिश्तों की कितनी अहमियत है। प्रिंस सलमान को सिर्फ सांकेतिक तौर पर निशाना बनाया गया है। किंग सलमान 85 साल के हैं और बीमार भी हैं। लिहाजा, शासन और सत्ता की पूरी बागडोर प्रिंस सलमान के हाथ में है। अमेरिका अपने 70 साल के सहयोगी को किसी भी सूरत में नाराज नहीं कर सकता। अमेरिका के हजारों हित मिडल ईस्ट में सऊदी की वजह से ही पूरे होते हैं।

ट्रम्प के रास्ते पर ही चलेंगे बाइडेन
अमेरिकी रिपोर्ट में भले ही प्रिंस सलमान पर उंगलियां उठाई गई हों, लेकिन इससे ज्यादा कुछ होने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। ट्रम्प के दौर में भी काफी बातें हुईं, लेकिन एक्शन के नाम पर कुछ नहीं हुआ। अब भी यही होगा। ईरान अब भी अमेरिका के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। इन हालात में बाइडेन कभी नहीं चाहेंगे कि सऊदी अरब को नाराज किया जा सके। प्रिंस सलमान के पास रूस और चीन जैसे ऑप्शन हैं और ये दोनों ही देश चाहेंगे कि यह अमीर मुल्क उनके पाले में आए।

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