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सीमाएं जनवरी 2020 से सील:उत्तर कोरिया छोड़ने के लिए रूसी राजनयिकों की 34 घंटे ट्रेन-बस में यात्रा; हैंडकार्ट को धक्का मार रूस पहुंचे

रेल रोड ट्रॉली पर रखा सामान। उस पर बैठे कुछ बच्चे और ट्रॉली को धक्का देता दंपती। यह नजारा किसी टीवी सीरियल या किसी फिल्म का नहीं, बल्कि उत्तर कोरिया का है। जहां पिछले एक साल से फंसे रूसी राजनयिकों को अपने देश पहुंचने के लिए 34 घंटे का दर्दभरा सफर तय करना पड़ा। दरअसल, कोरोना की वजह से उत्तर कोरिया की सीमाएं जनवरी 2020 से सील हैं।

अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं के साथ सड़क मार्ग भी बंद है। तानाशाह किम जोंग उन की हिदायत है कोई भी व्यक्ति उत्तर कोरिया प्रवेश न कर पाए। क्योंकि उसे डर है, यदि कोरोना का एक भी मामला उत्तर कोरिया आता है तो महामारी को रोक पाना उसके वश की बात नहीं होगी। ऐसे में राजनयिकों ने रूस पहुंचने के लिए सबसे पहले उत्तर कोरिया की जर्जर ट्रेन से 32 घंटे का सफर किया।

फिर दो घंटे बस में यात्रा की। राजनयिकों के पास ज्यादा सामान था, लिहाजा उन्होंने रेल रोड ट्रॉली लेकर आगे की यात्रा शुरू कर दी। जिस रेलरोड ट्रॉली को रूसी डिप्लोमेट हाथ से धक्का दे रहे थे, उसका नाम है- हैंडकार्ट। इसका इस्तेमाल करीब 200 साल पहले रेलवे ट्रैक पर सामान ढोने या फिर यात्रियों को ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

घर जाने के लिए एक कठिन सफर तय करना पड़ा

दूसरी ओर, उत्तर कोरिया स्थित रशियन एंबेसी ने हैंडकार्ट खींचने की दो तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं। लिखा- ‘रूसी दूतावास के 8 रूसी कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य अपने मातृभूमि लौट आए हैं। उत्तर कोरिया की सीमाएं और यातायात पिछले एक साल से बंद है। इसलिए उन्हें घर जाने के लिए काफी लंबा और एक कठिन सफर तय करना पड़ा।’

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