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इमरान खान के मंत्री ने किया दावा:पाकिस्तान को FATF से ब्लैकलिस्टेड होने का कोई खतरा नहीं, एक दिन पहले ग्रे लिस्ट किया गया था

इमरान खान सरकार में उद्योग मंत्री हम्माद अजहर ने दावा किया है कि फाइनेंशिल ऐक्शन टॉस्क फोर्स (FATF) से पाकिस्तान को ब्लैकलिस्टेड होने का कोई खतरा नहीं है। अजहर का बयान FATF की कार्रवाई के ठीक एक दिन बाद आया है। FATF ने गुरुवार को आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करने की वजह से पाकिस्तान को इस साल जून तक ग्रे लिस्ट में डाल दिया था।

अजहर बोले-पाकिस्तान ने बेहतर काम किया
वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि, पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई की है। साथ ही FATF के सभी पाइंट्स पर भी हमने अहम प्रगति की है। इसलिए ब्लैकलिस्ट होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने दावा किया कि FATF की 27 सूत्री कार्ययोजना को पूरा करने के पाकिस्तान के प्रयासों की दुनिया ने तारीफ की है।

FATF ने एक दिन पहले लगाया प्रतिबंध
फाइनेंशिल ऐक्शन टॉस्क फोर्स (FATF) ने एक दिन पहले ही पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा था। यह मियाद जून तक लागू रहेगी। वहीं 38 सदस्यों वाले टॉस्क फोर्स ने पाकिस्तान को ताकिद दी की अगर जून तक उसने 27 पाइंट्स पर अमल नहीं किया तो उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। टेरर फंडिंग को लेकर पाकिस्तान को अभी तीन पाइंट्स पर काम करने को कहा गया है। एफएटीएफ के अध्यक्ष मार्कस प्लेयर ने कहा कि पाकिस्तान को दी गई समयसीमा पहले ही समाप्त हो गई है और इस्लामाबाद को हमारी चिंताओं को जितनी जल्दी हो सके, दूर करना चाहिए।

पाकिस्तान तीसरी बार ग्रे लिस्ट में
पाकिस्तान तीन साल से ग्रे लिस्ट में है। 2018 में उसे इस लिस्ट में रखा गया था। FATF ने पिछले साल उसे 27 पॉइंट का एक प्रोग्राम सौंपा था। संगठन ने कहा था कि न सिर्फ इन शर्तों को पूरा करना है बल्कि, इसके पुख्ता सबूत भी देने होंगे। इमरान सरकार की कार्रवाई से FATF संतुष्ट नहीं है। पाकिस्तान 2012 में पहली बार ग्रे लिस्ट में रखा गया। तीन साल बाद 2015 में इस लिस्ट से हटा। 2018 में फिर उसके खिलाफ पुख्ता सबूत मिले और तब से अब तक वो ग्रे लिस्ट में है।

क्या है फाइनेंशिल ऐक्शन टॉस्क फोर्स
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स को संक्षिप्त रूप में FATF कहा जाता है। 1989 में दुनिया की सात आर्थिक महाशक्तियों (G7) ने इसकी स्थापना की थी। 38 देश इसके सदस्य हैं। फ्रांस के पेरिस में इसका हेडक्वॉर्टर है। यह संस्था आतंकवाद या हिंसा फैलाने वाले गुटों की फंडिंग और फाइनेंस से जुड़े मामलों पर नजर रखती है। मोटे तौर पर FATF की क्लीन चिट के बाद ही दुनिया के बड़े आर्थिक संगठन जैसे वर्ल्ड बैंक या IMF किसी देश को कर्ज या आर्थिक सहायता देते हैं। कई बार ब्याज दरें भी FATF की रिकमंडेशन्स के आधार पर तय की जाती है।

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