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ऑक्‍सफोर्ड वैक्‍सीन: कोरोना के नए स्‍ट्रेन में मददगार साबित हो सकती है

ऑक्‍सफोर्ड वैक्‍सीन सदी के सबसे भयावह महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए बहुत अच्छी खबर है। भारत के लिए यह तो और भी सुकून देने वाली बात है, क्योंकि यहां ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्राजेनेका की जो वैक्सीन इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी की दौड़ में सबसे आगे है, उसे कोरोना के नए प्रकार (स्ट्रेन) के खिलाफ भी कारगर माना जा रहा है। नए आंकड़ों के आधार पर कंपनी के हवाले से ब्रिटेन की मीडिया ने यह दावा किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक ऑक्सफोड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को ब्रिटिश स्वास्थ्य नियामक एजेंसी गुरुवार से पहले इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे सकती है। एक दिन पहले ही भारत ने कहा है कि ब्रिटेन में मंजूरी मिलने के बाद वह भी इस बारे में फैसला करेगा। भारत में इस वैक्सीन को पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कोविशील्ड के नाम से तैयार कर रही है। भारत में जिन तीन वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिलने की उम्मीद है, उनमें कोविशील्ड सबसे आगे है। इसके अलावा फाइजर और भारत बायोटेक ने भी मंजूरी के लिए दवा नियामक के यहां आवेदन किया है।

एस्ट्राजेनेका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पास्कल सोरियोट ने कहा कि नवीनतम डाटा के मुताबिक वैक्सीन फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन की तरह 95 फीसद सुरक्षित और गंभीर संक्रमण रोकने में 100 फीसद कारगर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह वैक्सीन कोरोना वायरस के नए संक्रामक रूप (स्ट्रेन) के खिलाफ भी प्रभावी रहनी चाहिए।

पास्कल ने कहा, “हमें लगता है कि हमने जीत के फॉर्मूले और इसे प्रभावी बनाने का पता लगा लिया है, दो खुराक के बाद यह हर किसी में प्रभावी रही है।”

वहीं, लंदन के अखबार “द संडे टाइम्स” ने एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा है कि वैक्सीन को मंजूरी मिलने के तुरंत बाद सबसे पहले 1.2 से 1.5 करोड़ लोगों यह वैक्सीन लगाई जाएगी। ये वो लोग हैं जिन्हें कोरोना से संक्रमित होने पर अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है।

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