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कांगो में आतंकी हमला:यूनाइटेड नेशंस के काफिले पर आतंकियों ने गोलियां बरसाईं, इटली के राजदूत समेत 2 की मौत

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में सोमवार को इटली के राजदूत लुका अटानासियो की हत्या कर दी गई। वह यूनाइडेट नेशंस के काफिले में शामिल थे। इसी दौरान आतंकियों ने उनकी कार पर हमला कर दिया। इसमें 43 साल के लुका घायल हो गए। हॉस्पिटल में उन्होंने दम तोड़ दिया। इटली के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है। यह हमला ईस्टर्न रीजनल कैपिटल गोमा के पास हुआ। इसमें एक सुरक्षा अधिकारी की भी मौत हो गई।

हमले के बाद यूनाइटेड नेशंस की एजेंसी वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने बयान जारी कर कहा है कि हमले में उसके सबसे बड़े सहयोगी की मौत हो गई। कई लोग घायल भी हैं। यह डेलिगेशन स्कूल फीडिंग प्रोग्राम के तहत फील्ड ट्रिप पर था। जिस रास्ते से काफिला गुजर रहा था, उसे बहुत सुरक्षित माना जाता है। काफिले के साथ सिक्योरिटी टीम नहीं थी।

इलाके में विद्रोही गुट सक्रिय
हमले वाली जगह गोमा से 2 घंटे की दूरी पर है। राजधानी से बाहर सड़क पर निकलना खतरे भरा होता है क्योंकि यहां विद्रोही गुट सक्रिय हैं। इस इलाके में बड़ी संख्या में यूएन के शांति सैनिक तैनात हैं। गोमा से बाहर जाने के लिए यूएन के काफिले को सुरक्षा मंजूरी लेनी होती है।

यह इलाका नॉर्थ किवू प्रांत में आता है और विद्रोही गुट एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस (ADF) का गढ़ है। इसकी सीमा रवांडा और युगांडा से मिलती हैं। ADF आतंकी संगठनों और युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों को साथ लाया था।

1990 तक इस प्रांत में ADF का ही राज था। 2017 में यह ग्रुप इस्लामिक स्टेट के साथ शामिल हो गया। संयुक्त राष्ट्र ने इसे सैकड़ों नागरिकों की हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

गृह युद्ध की मार झेल रहा देश
कांगो इस समय गृह युद्ध की मार झेल रहा है। इस वजह से यहां यूनाइडेट नेशंस के शांति सैनिक तैनात हैं। 1960 में आजादी मिलने के बाद से जनवरी, 2019 में यहां पहली बार शांति से सत्ता का ट्रांसफर हुआ था। तब फेलिक्स त्सेसेक्सी देश के राष्ट्रपति चुने गए थे।

कांगो गणराज्य क्षेत्रफल के लिहाज से तीसरा सबसे बड़ा देश है। इसकी सीमाएं उत्तर में मध्य अफ्रीकी गणराज्य और सूडान, पूर्व में युगांडा, रवांडा और अंगोला से लगी हैं। क्षेत्रफल में यह विश्व का 11वां सबसे बड़ा देश है। फ्रैंच बोलने वाला यह सबसे बड़ी आबादी वाला देश है।

कांगों में सरकारी सैनिकों और विद्रोहियों के बीच लगभग 2 दशक तक संघर्ष चला। 2006-07 में तो नॉर्थ किवु प्रांत के गोमा शहर को रेप कैपिटल ऑफ वर्ल्ड कहा जाता था। तब इस शहर में हर घंटे 48 महिलाओं से रेप होता था। 1960 में कांगो के हालात बिगड़ने के बाद सबसे पहले अपने शांति सैनिक भेजने वाले देशों में भारत भी शामिल था। यहां अब भी भारत के सैकड़ों सैनिक तैनात हैं।

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