Connect with us

World

फेसबुक और ऑस्ट्रेलिया में तनाव बढ़ा:ऑस्ट्रेलियाई PM ने नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की, टेक कंपनियों की दादागिरी का मुद्दा उठाया

Published

on

ऑस्ट्रेलिया सरकार और फेसबुक के बीच न्यूज कंटेंट शेयरिंग और इसके पेमेंट का मुद्दा अब बड़ा विवाद बन गया है। फेसबुक ने ऑस्ट्रेलिया के मीडिया हाउसेज के तमाम कंटेंट की शेयरिंग बैन कर दी और अपना पेज भी ब्लॉक कर दिया। फेसबुक अपना मुनाफा मीडिया कंपनियों से शेयर नहीं करना चाहती। दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलियाई सरकार भी फेसबुक और गूगल के सामने झुकने तैयार नहीं है। वो इससे संबंधित कानून का मसौदा तैयार कर चुकी है। संसद के निचले सदन से यह पास हो चुका है। उच्च सदन में जल्द ही यह पेश किया जाएगा।

इस विवाद के बीच ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मॉरिसन ने मोदी से टेक कंपनियों की दादागिरी के खिलाफ मुहिम में भारत सरकार की मदद मांगी।

फेसबुक के आगे नहीं झुकेंगे
फेसबुक चीफ मार्क जकरबर्ग ने शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई अफसरों से प्रस्तावित कानून के बारे में बातचीत की। इसके बाद प्रधानमंत्री मॉरिसन ने साफ कहा- फेसबुक की धमकियों के सामने झुकने का सवाल ही नहीं उठता। हम अपने देश और यहां की कंपनियों के हित जरूर देखेंगे। हालांकि, फेसबुक से बातचीत चल रही है और मुमकिन है कि कोई रास्ता निकल आए। इस बारे में कुछ टीमें बनाई गई हैं जो तमाम मुद्दों पर बातचीत कर रही हैं।

कानून में क्या है
कोरोना जब चरम पर था, उस दौरान फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों ने काफी मुनाफा कमाया, लेकिन मीडिया हाउसेस के घाटा हुआ। उनको छंटनी करनी पड़ी। इस दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म न्यूज लिंक शेयर करके पैसा कमाते रहे। अब ऑस्ट्रेयाई सरकार ने जो कानून बनाया है, उसके मुताबिक-सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अगर न्यूज कंटेंट शेयर करेंगे तो संबंधित कंपनी से प्रॉफिट शेयर करना होगा। फेसबुक और गूगल इसे मानने तैयार नहीं हैं। वे ऑस्ट्रेलिया में सर्विसेस बंद करने की धमकी दे रही हैं।

मॉरिसन ने टेक कंपनियों की धमकियों के आगे झुकने से इनकार कर दिया और दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों से इस बारे में बातचीत की। मॉरिसन ने कहा- मैंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस बारे में बातचीत की है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

World

NASA के पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल ग्रह से भेजा ऑडियो, लैंडिंग का VIDEO भी जारी किया

Published

on

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने लाल ग्रह (मंगल) पर 18 फरवरी को की गई लैंडिंग के आखिरी मिनटों का एक वीडियो जारी किया है। नासा ने मार्स 2020 पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) द्वारा लिए गए वीडियो के साथ ही एक ऑडियो भी जारी की है। यह मंगल ग्रह से पहला ऑडियो है। रोवर पर एक माइक्रोफोन ने हवाओं की आवाज भी रिकॉर्ड की है।

पर्सिवियरेंस के कैमरा और माइक्रोफोन सिस्टम के लीड इंजीनियर डेव ग्रुएल ने कहा कि 60 सेकंड की रिकॉर्डिग में लगभग 10 सेकंड तक हवा की आवाज सुनी जा सकती है। इसके अलावा इसमें रोवर के कारण पैदा हुई आवाज भी सुनी जा सकती है। नासा का रोवर जेजेरो केट्रर में उतरा है, जहां पैराशूट खुलने से लेकर लैंडिंग तक के दृश्य वीडियो में देखे जा सकते हैं।

मंगल ग्रह की लैंडिंग का दुनिया का सबसे अंतरंग दृश्य
अंतरिक्ष यान द्वारा मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल में 20,100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से प्रवेश करने के लगभग 230 सेकंड बाद मंगल ग्रह की लैंडिंग का दुनिया का सबसे अंतरंग दृश्य शुरू होता है।

वीडियो में रोवर को सतह पर लैंड करते हुए दिखाया गया
नासा की ओर से जारी हाई डेफिनेशन वीडियो में पर्सिवियरेंस रोवर एक लाल और सफेद रंग के पैराशूट के सहारे सतह पर उतरते हुए दिखाई दे रहा है। इस वीडियो में धूल के गुबार के बीच रोवर को सतह पर लैंड करते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो 3 मिनट 25 सेकंड का है।

मंगल पर पहली बार किसी रोवर की लैंडिंग कैप्चर की गई
नासा के जेट प्रोपल्सन लेबोरेटरी के निदेशक माइकल वाटकिंस ने कहा कि यह पहली बार है जब हमने मार्स पर लैंडिंग जैसे किसी इवेंट को कैप्चर करने में सक्षम हुए हों। उन्होंने कहा कि ये वाकई में कमाल का वीडियो है।

नासा के कार्यवाहक प्रशासक स्टीव जुर्सिस्क ने मंगल ग्रह पर उतरने को लेकर लोगों के बीच बने रहने वाले उत्साह को लेकर एक बयान में कहा कि जो लोग आश्चर्य करते हैं कि आप मंगल ग्रह पर कैसे उतरते हैं, या फिर यह इतना मुश्किल क्यों है, या ऐसा करना कितना कूल होगा, अब आपको आगे देखने की जरूरत नहीं है।

Continue Reading

World

नस्लवाद पर पूर्व US प्रेसिडेंट का खुलासा:ओबामा बोले- एक दोस्त ने रंगभेदी कमेंट किया था, मैंने उसकी नाक तोड़ दी थी

Published

on

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने साथ हुए नस्लभेद पर रोचक घटना बताई। ओबामा के मुताबिक- स्कूल के दिनों में मेरे एक साथी ने मुझ पर नस्लभेदी और रंगभेदी टिप्पणी की थी, गुस्से में मैंने उसकी नाक तोड़ दी थी। ओबामा के अनुसार, यह घटना स्कूल के लॉकर रूम में हुई थी। ओबामा 8 साल तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे। उन्होंने दो कार्यकाल पूरे किए। उस दौरान जो बाइडेन वाइस प्रेसिडेंट थे और अब वे अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति हैं।

पोडकास्ट में शामिल हुए ओबामा
‘द हिल’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नस्लभेद पर ओबामा ने यह खुलासा एक पॉडकास्ट के दौरान किया। इस प्रोग्राम के एंकर ब्रूस स्प्रिंगस्टीन थे। ओबामा ने इस घटना के बारे में कहा- मैं जब स्कूल में था तो मेरे कई दोस्त थे। एक दोस्त खास था। हम साथ में बास्केटबॉल खेलते थे। एक बार हम खेल रहे थे और इसी दौरान आपस में झगड़ा हो गया। उसने मुझसे कुछ नस्लभेदी शब्द कहे। उसने शायद जो कुछ कहा, उसका अर्थ भी वो नहीं जानता था। मैं गुस्से में था। मैंने एक घूंसा उसकी नाक पर मारा और उसकी नाक तोड़ दी। इस पर एंकर ने कहा- आपने बिल्कुल सही किया।

फिर मतलब समझाया
अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति रहे ओबामा ने आगे कहा- घटना के बाद मैंने अपने उस दोस्त को बताया कि उसने जो कहा उसका क्या मतलब होता है। माना जा रहा है कि ओबामा ने पहली बार इस तरह की घटना का सार्वजनिक तौर पर जिक्र किया है। ओबामा के मुताबिक, मैं गरीब और बदसूरत हो सकता हूं, लेकिन इसके यह मायने बिल्कुल नहीं हैं कि कोई मेरा अपमान करे। और जो गलती मैंने नहीं की, उसकी सजा कैसे मिल सकती है.

पहले भी यह मुद्दा उठा चुके हैं ओबामा
अमेरिका में पिछले चुनाव में नस्लवाद का मुद्दा कई बार उठा। ओबामा ने अपने कार्यकाल और इसके बाद भी कई बार इस मुद्दे का जिक्र किया है। 2015 में उन्होंने कहा था- अमेरिका में नस्लवाद की कोई जगह नहीं है। हम इसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं कर सकते। यह 300 पहले हो सकता था, लेकिन अब तो इसकी कोई जगह हो ही नहीं सकती।

Continue Reading

World

कोरोना दुनिया में:यूरोपीय यूनियन के 6 देश बॉर्डर बैन खत्म करने पर राजी, ब्रिटिश PM बोले- जून तक हालात सामान्य हो जाएंगे

Published

on

दुनिया में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 11.26 करोड़ से ज्यादा हो गया। 8 करोड़ 82 लाख से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं। अब तक 24 लाख 95 हजार से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। ये आंकड़े www.worldometers.info/coronavirus के मुताबिक हैं।

EU का फैसला
EU यानी यूरोपीय यूनियन के 6 देश बॉर्डर पर आवाजाही सामान्य करने पर राजी हो गए हैं। यह प्रतिबंध अब तक दो बार लगाए और फिर हटाए जा चुके हैं। बेल्जियम, डेनमार्क, फिनलैंड, जर्मनी, हंगरी और स्वीडन ने यह फैसला किया है। इस बारे में यूरोपीयन कमीशन को एक रिपोर्ट भेजी गई है। इस पर आज फैसला हो सकता है। हालांकि, इसके लिए कुछ नियम जारी रहेंगे। हाल के दिनों में ऑस्ट्रिया और जर्मनी के बीच इस मुद्दे पर तनाव हो गया था। इसके बाद हालात सामान्य करने पर सहमति बनी।

जून तक हालात सामान्य होने की उम्मीद
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि देश में लगे तमाम तरह के प्रतिबंधन जून तक हटा लिए जाएंगे और हालात पहले की तरह सामान्य हो जाएंगे। एक प्रोग्राम के दौरान जॉनसन ने कहा- सरकार अपनी तरफ से हर वो कदम उठा रही है जो हालात सामान्य कर सकते हैं। हम पहले ही आर्थिक स्थिती सामान्य करने के लिए पैकेज का ऐलान कर चुके हैं। जॉनसन ने फिर कहा है कि बेरोजगारी को खत्म करने के लिए प्लान बनाया जा चुका है और इस पर अमल किया जा रहा है। इसमें एक्सपर्ट्स की राय को भी तवज्जो दी गई है। उन्होंने कहा कि स्कूल भी बहुत जल्द खोल दिए जाएंगे। इसके लिए तैयारियां अंतिम दौर में हैं।

फ्रांस में दिक्कत बढ़ी
फ्रांस के अस्पतालों में मरीजों की संख्या फिर बढ़ने लगी है। आईसीयू में भर्ती मरीज काफी तेजी से बढ़े हैं। 12 हफ्ते में पहली बार आंकड़ा 3 हजार से ज्यादा हुआ। मंगलवार को कुल 3 हजार 435 मरीज आईसीयू में एडमिट किए गए। इनमें से कुछ की हालत तो काफी गंभीर बताई गई है। फ्रांस के हालात इसलिए भी चिंताजनक माने जा सकते हैं क्योंकि यूरोप के बाकी देश बॉर्डर प्रतिबंध खत्म करने पर विचार कर रहे हैं और आज इस पर फैसला भी हो सकता है, लेकिन फ्रांस सरकार किसी मामले में रिस्क नहीं लेना चाहती। उसने लॉकडाउन से तो इनकार किया है, लेकिन बाकी प्रतिबंधों को जारी रखने का फैसला किया है।

इटली पर गंभीर आरोप
‘द गार्डियन’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इटली ने पिछले साल फरवरी में WHO को महामारी के बारे में सही जानकारी नहीं दी, जबकि देश में केस मिलने शुरू हो गए थे। दरअसल, दुनिया के तमाम देशों को इंटरनेशनल हेल्थ रेग्युलेशन्स (IHR) का पालन करना होता है।

साल की शुरुआत में बीमारियों से जुड़ी सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट देनी होती है। इटली ने 4 फरवरी 2020 को यह रिपोर्ट तो दी, लेकिन इसमें खुद को लेवल 5 पर बताया। इसके मायने ये हैं कि किसी बीमारी से लड़ने की उसकी तैयारी सही स्तर पर है। रिपोर्ट के मुताबिक इटली ने 2006 के बाद राष्ट्रीय महामारी उन्मूलन यानी महामारी से निपटने का प्लान ही अपडेट नहीं किया। दावा किया जाता है कि अमेरिका से पहले इटली में महामारी ने दस्तक दी। चीन के बाद इटली पहला देश था, जहां महामारी पैर पसार चुकी थी।

टॉप-10 देश, जहां अब तक सबसे ज्यादा लोग संक्रमित हुए

(ये आंकड़े www.worldometers.info/coronavirus/ के मुताबिक हैं)

Continue Reading

Trending