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मंगल पर सबसे खतरनाक मिशन:नासा का पर्सिवियरेंस रोवर 18 फरवरी को मार्स के जजीरो क्रेटर पर उतरेगा, यहां कभी पानी भरा रहता था

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का पर्सिवियरेंस मार्स रोवर (Perseverance Rover) गुरुवार को मंगल (Mars) पर जीवन के तलाश के लिए उतरेगा। यह देर रात दो से तीन बजे के बीच मार्स के सबसे खतरनाक सतह जजीरो क्रेटर पर लैंडिंग करेगा। इस सतह पर कभी पानी हुआ करता था। नासा ने दावा किया है कि यह अब तक के इतिहास में रोवर की मार्स पर सबसे सटीक लैंडिंग होगी। पर्सिवियरेंस रोवर लाल ग्रह से चट्‌टानों के नमूने भी लेकर आएगा।

पानी की खोज और जीवन की पड़ताल करेगा
पर्सिवियरेंस मार्स रोवर और इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर मंगल ग्रह पर कार्बन डाई-ऑक्साइड से ऑक्सीजन बनाने का काम करेंगे। यह जमीन के नीचे जीवन संकेतों के अलावा पानी की खोज और उनसे संबंधित जांच भी करेगा। इसका मार्स एनवायर्नमेंटल डायनामिक्स ऐनालाइजर (MEDA) मंगल ग्रह के मौसम और जलवायु का अध्ययन करेगा।

मिशन पर चौथी पीढ़ी का पांचवा रोवर
इससे पहले भी नासा के चार रोवर मंगल की सतह पर उतर चुके हैं। पर्सिवियरेंस नासा का चौथी पीढ़ी का रोवर है। इससे पहले पाथफाइंडर अभियान के लिए सोजोनर को साल 1997 में भेजा गया था। इसके बाद साल 2004 में स्पिरिट और अपोर्च्यूनिटी को भेजा गया। वहीं 2012 में क्योरिसिटी ने मंगल पर डेरा डाला था।

ऐसा है पर्सिवियरेंस मार्स रोवर
नासा के मार्स मिशन का नाम पर्सिवरेंस मार्स रोवर और इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर है। पर्सिवरेंस रोवर 1000 किलोग्राम वजनी है। यह परमाणु ऊर्जा से चलेगा। पहली बार किसी रोवर में प्लूटोनियम को ईंधन के तौर पर उपयोग किया जा रहा है। यह रोवर मंगल ग्रह पर 10 साल तक काम करेगा। इसमें 7 फीट का रोबोटिक आर्म, 23 कैमरे और एक ड्रिल मशीन है। वहीं, हेलिकॉप्टर का वजन 2 किलोग्राम है।

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