Breaking News

Jharkhand: रांची में भगवान जगन्नाथ नहीं गए मौसी बाड़ी, नहीं निकली रथयात्रा

Jharkhand: रांची में भगवान जगन्नाथ नहीं गए मौसी बाड़ी, नहीं निकली रथयात्रा

 

Ranchi: रांची के जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) में 300 वर्षों से ज्यादा वक्त से रथ यात्रा निकाले जाने की परंपरा है. इस रथ यात्रा से राज्य भर के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. लेकिन कोरोना संक्रमण (Coronavirus) को देखते हुए झारखंड सरकार (Jharkhand Government) ने लगातार दूसरे साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकालने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया. इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High court) में एक याचिका दायर कर जगन्नाथपुर रथ यात्रा निकालने की अनुमति देने की मांग की गई थी. जिसपर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को किसी भी प्रकार का निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया था, और फैसला सरकार पर छोड़ दिया था.

महामारी के हालात को देखते हुए झारखंड सरकार ने रथ यात्रा निकालने और मेले के आयोजन की मंजूरी तो नहीं दी, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन परिवार के साथ जगन्नाथपुर मंदिर में पूजा-अर्चना करने जरुर पहुंचे. पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, ‘हर साल की तरह आज भी रथ यात्रा का दिन है, लोग बहुत हर्षोउल्लास के साथ रथ यात्रा मनाते रहे हैं. भगवान जगन्नाथ के मंदिर परिसर में जो चहलकदमी होती थी, उसके गवाह सब लोग हैं, लेकिन दुर्भाग्य है कि करीब डेढ़ साल से हमारा देश और राज्य एक गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, जिसके कारण हम रथ यात्रा नहीं निकाल पा रहे हैं.’

मुख्यमंत्री ने कहा की इस महामारी में कितनों की जान चली गयी इसका आंकलन मुश्किल है, अनेकों चीज प्रभावित हुई, आज भी ये बीमारी हमारे इर्द गिर्द मंडरा रहा है और दूसरी बार है कि हम रथ यात्रा नहीं निकाल पाने की स्थिति में हैं. उन्होंने कहा की आस्था के प्रतीक हम अपने अपने घरों और दिल में ही भगवान की आराधना कर रहे हैं. भगवान का पट बन्द होने के बावजूद उनके चौकठ पर आया हूँ और सिर झुका का राज्य को देश को इस संक्रमण से बाहर निकालने की विनती कर रहा हूं.

वहीं, रांची में रथयात्रा नहीं निकलने पर बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने कहा की वो सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से विरोध उचित नहीं समझते, यहां उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए इस बात का समर्थन करता हूँ कि रथ यात्रा पर लगी रोक गलत नहीं है, और सिर्फ रथ यात्रा ही नहीं बल्कि ऐसे किसी भी धार्मिक आयोजन पर रोक लगना चाहिए, और वो वोट की राजनीति की दृष्टि से नहीं होना चाहिए, सारे फैसले जीवन को देखते हुए लिए जाने चाहिए.

वहीं, जगन्नाथ मंदिर न्यास समिति के उपाध्यक्ष नवीन नाथ शाहदेव ने भी सरकार के फैसले को सही बताते हुए कहा की अगर इस वैश्विक महामारी के समय रथ यात्रा का आयोजन होता तो भगवान की भक्ति भावना में काफी लोग पहुंच जाते, जिन्हें संभालना मुश्किल हो जाता. नवीन नाथ शाहदेव के मुताबिक इस स्थिति में जो निर्णय लिया गया है, वो सर्वमान्य है, मंदिर प्रबंधन भी इसका समर्थन करता है, साथ ही भगवान से विनती है इस महामारी को जल्द समाप्त करें.

कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए रथ यात्रा का आयोजन भले ही नहीं हुआ, लेकिन कोरोना गाइडलाइन के तहत जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना जरुर हुई…इस दौरान आम श्रद्धालुओ के लिए मंदिर में प्रवेश वर्जित रहा. हालांकि, इसके बावजूद श्रद्धालु मंदिर पहुंचते रहें और बाहर से ही पूजा कर लौट गए.

बता दें कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले से ही मेले, प्रदर्शनी, जुलूस और मंदिरों में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा रखी है. मंदिर में सिर्फ पुजारी ही पूजा कर सकते हैं.

प्रातिक्रिया दे