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कोरोना के खिलाफ रामबाण साबित हुआ यह मॉडल, वायरस को अब इन गांवों से लगता है डर

कोरोना के खिलाफ रामबाण साबित हुआ यह मॉडल, वायरस को अब इन गांवों से लगता है डर

प्रदीप शर्मा/भिंडः कोरोना की दूसरी लहर ने देश भर में हाहाकार मचा दिया. संक्रमण ने शहरों से निकलकर गांवों तक पैर पसार लिये, दूरदराज के इलाकों में जागरूकता की कमी ने प्रशासन को भी परेशान कर दिया. लेकिन कहते हैं अगर समाज एकजुट हो जाए तो बड़े से बड़े संकट से भी लड़ा जा सकता है, बात जब कोरोना महामारी की हो, तब भी यही फॉर्मूला काम करता है. इसी मंत्र को अपनाया भिंड के दो गांवों ने और देश के सामने ऐसा कम्यूनिटी मॉडल पेश किया, जो दूसरों के लिये मिसाल बन गया. क्योंकि इसी मॉडल के चलते इन गांवों में कोरोना संक्रमण पर काबू पाया गया. 

जागरूकता के दम पर कोरोना को दी मात 
ना लॉकडाउन, ना सख्ती, ना ही प्रशासन का डर, सिर्फ जागरूकता के दम पर महामारी को दे दी मात. जी हां यह सब कर दिखाया है कि भिंड जिले में आने वाले सोनी और कनेरा गांव के लोगों ने. क्योंकि यहां के लोगों ने सावधानी बरती और पूरी गांव महामारी का मुकाबला करने के लिए एक साथ खड़ा हो गया. 

कम्युनिटी मॉडल को बनाया कोरोना से लड़ने का हथियार 
सोनी और कनेरा गांव के लोगों ने कोरोना से लड़ने के लिए कम्युनिटी मॉडल को हथियार बनाया है. कम्युनिटी मॉडल का असर कुछ ऐसा रहा कि करीब डेढ़ महीने में ही दोनों गांव कोरोना मुक्त हो गए. दरअसल, 14 अप्रैल 2021 कोरोना का पहला केस आने के बाद गांवों में हड़कंप मच गया, लोग जिसे साधारण सर्दी, खांसी ,जुकाम समझ रहे थे दरअसल, वो कोरोना की दस्तक थी. संक्रमण की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम भी एक्टिव हो गई. सर्वे के बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए. गांव भर में 22 एक्टिव केस थे. हालत गंभीर होने पर 2 मरीजों को ग्वालियर रेफर करना पड़ा.

हालात और ना बिगड़ें इसलिए सबसे पहले गांव भर को सैनिटाइज किया गया. संक्रमित लोगों के घरों के बाहर बैरिकेडिंग की गई. पूरी सख्ती बरती गई लोगों को समझाया गया कि कोरोना की लड़ाई सावधानी से ही जीती जा सकती है. ऐसे में ग्रामीणों ने भी समझदारी दिखाई और सभी ने सावधानी बरती. जिसका असर यह हुआ कि प्रशासन को सबसे बड़ा साथ मिला खुद गांव वालों का. क्योंकि एक गलती प्रशासन की पूरी मेहनत पर पानी फेरने के लिये काफी थी. 

गांव में बाहरी लोगों की एंट्री बंद की गई 
दरअसल, यह वह वक्त था जब देश में कोरोना की दूसरी लहर रफ्तार पकड़ रही थी. ना तो अस्पतालों में बेड मिल रहे थे. ना इंजेक्शन थे और ना ही ऑक्सीजन, ऐसे में गांववालों ने अपने दम पर कोरोना को हराने की ठानी. सोनी गांव के हर शख्स ने खुद को घर में कैद कर लिया. गांव में बाहरी लोगों की एंट्री बंद कर दी गई. ये एक तरह का स्वघोषित लॉकडाउन था और यही फैसला संकटकाल में गांववालों के लिये रामबाण साबित हुआ. 

सोनी और कनेरा गांव अब पूरी तरह कोरोना मुक्त है. गांववालों की जागरूकता के चलते ही बड़ा संकट टला है, लेकिन कोरोना की तीसरी लहर का डर अब भी बना हुआ है. यही वजह है कि गांववाले पहले से ज्यादा सचेत हैं. आज भी गांव में लोग भीड़ लगाने से बच रहे हैं. यहां का बच्चा-बच्चा मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सेनिटाइजर का इस्तेमाल करना नहीं भूलता. कनेरा गांव ने भी कमोबेश इसी मॉडल को अपनाया और जानलेवा वायरस को शिकस्त दी. भिंड के इन दो गांवों के कम्युनिटी मॉडल ने पूरे प्रदेश के सामने मिसाल पेश की है. अगर समय रहते सतर्कता बरती जाए. तो गंभीर संकट का सामना भी साथ मिलकर किया जा सकता है.

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