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Rajasthan : राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस नेताओं-कार्यकर्ताओं की फिर से जगी आस

Jaipur : राजस्थान (Rajasthan News) में कांग्रेसी सरकार को ढाई साल का वक्त बीत चुका है. पंचायत से लेकर निकाय और उपचुनाव को जिताने में कांग्रेस के नेताओं कार्यकर्ताओं ने कड़ी मेहनत की है, लेकिन इसके बावजूद कार्यकर्ताओं की मेहनत का जो रिवॉर्ड उन्हें मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाया, लेकिन अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने जिस तरह से वित्त आयोग अध्यक्ष पद जैसी बड़ी नियुक्ति पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदुमन सिंह को जिम्मेदारी सौंपी है. पार्टी के नेताओं कार्यकर्ताओं की बोर्ड निगमों और नियुक्तियों की आस फिर से जग गई है.

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प्रदेश में पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रद्युमन सिंह को वित्त आयोग का चेयरमैन बनाए जाने के बाद एक बार फिर से राजनीतिक नियुक्तियों की कवायद चल पड़ी है. पिछले ढाई साल से राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में फिर से आस जगी है. हालांकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद राजनीतिक नियुक्तियों (Political Appointments ) तो दूर की बात संवैधानिक संस्थाओं में पदों को भरने में गहलोत सरकार (Gehlot Government) को ढाई साल से ज्यादा का समय लग गया है. 

हैरत की बात तो यह है कि प्रदेश में एक दर्जन से ज्यादा संवैधानिक संस्थाएं है लेकिन महज आधा दर्जन संवैधानिक संस्थाओं को भरने में ही गहलोत सरकार ढाई साल से भी ज्यादा का समय लगा दिया जबकि आधा दर्जन से ज्यादा संवैधानिक संस्थाओं में पद अभी भी खाली हैं. इनमें कई संस्थाएं तो कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक के रूप में माने जाने वाले अल्पसंख्यक और एससी-एसटी वर्ग से जुड़े हैं. संवैधानिक संस्थाओं और निगम-बोर्डों में राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने से परंपरागत वोट बैंक भी खुलकर सत्ता और संगठन से सवाल करता नजर आ रहा है. शेष बचे आधा दर्जन संवैधानिक संस्थाओं में पद भरने का नंबर कब आएगा इसे लेकर कांग्रेस के सियासी गलियारों में भी चर्चा खूब है.

दरअसल दिसंबर 2018 में गहलोत सरकार के गठन के बाद से खाली पड़े आयोगों, निगम- बोर्डों में राजनीतिक नियुक्तियां की जानी थी लेकिन सरकार ने आधा दर्जन संवैधानिक संस्थाओं में ही राजनीतिक नियुक्तियां करने में ढाई साल का समय लगा दिया. इनमें मानव अधिकार आयोग, लोकायुक्त, सूचना आयोग, बाल आयोग, राजस्थान लोक सेवा आयोग और वित्त आयोग हैं. वहीं, दूसरी ओर महिला आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, एससी-एसटी आयोग, ओबीसी आयोग, किसान आयोग और निशक्तजन आयोग में पद अभी खाली पड़े हैं.
दरअसल कांग्रेस सत्ता और संगठन की मंशा है कि तमाम संवैधानिक संस्थाओं में पदों को भरने के बाद प्रदेश स्तरी बोर्ड निगमों और जिला स्तर पर राजनीतिक नियुक्तियां की जाएं, लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर शेष बचे संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्तियां करने में अभी भी समय लगेगा तो फिर बोर्ड-निगमों में राजनीतिक नियुक्तियों का नंबर कब आएगा?

उम्मीद की जानी चाहिए कि कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा नियुक्तियों में आ रही तमाम दिक्कतों को दूर कर जल्द ही कार्यकर्ताओं को तोहफा देंगे.

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