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Maharashtra: सरकारी आवास के बाहर गृह विभाग के अधिकारियों से मिले Anil Deshmukh, 3 घंटे चली बातचीत

मुंबई: मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह (Param Bir Singh) के ‘लेटर बम’ और 100 करोड़ रुपये की उगाही के आरोप के बीच महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) ने सोमवार को सरकारी निवास से निकलकर सह्याद्रि गेस्ट हाउस पहुंचे. इस दौरान उनके साथ गृह विभाग के कुछ अधिकारी भी मौजूद थे. अनिल देशमुख रात 8 बजे से लेकर 11 बजे तक सह्याद्रि गेस्ट हाउस में मौजूद रहे और गृह विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की.

मीडिया के सवालों से बचते नजर आए अनिल देशमुख

सह्याद्रि गेस्ट हाउस में तीन घंटे रहने के दौरान अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) ने गृह विभाग के अधिकारियों के साथ किस बात को लेकर चर्चा की, यह जानकारी सामने नहीं आई है. गेस्ट हाउस से बाहर निकलते समय अनिल देशमुख मीडिया के सवालों से बचते नजर आए. इसके बाद वह 11 बजे के बाद ज्ञानेश्वरी स्थित अपने सरकारी निवास लौटे.

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अनिल देशमुख को मिला शरद पवार का साथ

शरद पवार (Sharad Pawar) ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अनिल देशमुख का साथ दिया. उन्होंने कहा कि अनिल देशमुख और सचिन वझे के बीच बातचीत के आरोप गलत हैं, क्योंकि फरवरी महीने में देशमुख अस्पताल में भर्ती थे. इस दौरान शरद पवार ने अनिल देशमुख के अस्पताल में भर्ती होने का पर्चा भी दिखाया और कहा कि कोरोना वायरस की संक्रमण की वजह से वह 5 से 15 फरवरी तक नागपुर के अस्पताल में भर्ती थे. इसके बाद 16 फरवरी से 27 फरवरी तक वह होम आइसोलेशन में थे. शरद पवार ने कहा, ‘इससे यह साफ हो जाताया है कि अनिल देशमुख पर लगाए गए आरोप गलत थे, ऐसे में उनके इस्तीफे का सवाल नहीं उठता है. परमबीर सिंह के आरोपों से महाराष्ट्र सरकार पर कुछ असर नहीं पड़ेगा.’

पूर्व पुलिस कमीश्नर ने लगाए थे गंभीर आरोप

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) चाहते थे कि पुलिस अधिकारी बार और होटलों से हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करके उन्हें पहुंचाएं. आरोपों के बाद दिल्ली में शरद पवार के घर पर एनसीपी की बैठक हुई, जिसमें एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल, अजित पवार, सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल शामिल हुए. बैठक के बाद शरद पवार ने कहा कि परमबीर सिंह की चिट्ठी में लगाए गए आरोप गंभीर जरूर हैं, लेकिन इसमें कोई सबूत नहीं दिया गया है. इन आरोपों की गहन जांच की जरूरत है और उद्धव ठाकरे इस मामले में आखिरी फैसला लेंगे.

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