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Rajasthan में उपचुनाव के लिए BJP ने कसी कमर, इन मुद्दों को लेकर मैदान में उतरेगी पार्टी

Jaipur: प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों पर होने वाले उप चुनाव के लिए भाजपा ने कमर कस ली है. इधर, चुनाव में बहुत कम समय रहने के कारण कोर कमेटी के बिना ही प्रत्याशियों की घोषणा की जाएगी. भाजपा प्रदेशाध्यक्ष स​तीश पूनियां ने सोमवार को भाजपा मुख्यालय में मीडिया से यह बात कही.

दरअसल, प्रदेश की तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव के नतीजे हालांकि भाजपा की संख्या बल को किसी प्रकार से प्रभावित नहीं करेंगे, लेकिन जीत आखिर जीत होती है. यही कारण है कि पंचायत चुनावों में बढ़त के आधार पर भाजपा तीनों सीटों पर जीत के कयास लगा रही है.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ने आज पार्टी कार्यालय में पार्टी के मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों की बैठक ली. सामूहिक बैठक के बाद उनसे एक-एक कर भी चर्चा की. बैठक के बाद पूनिया ने मोर्चा पदाधिकारियों को उपचुनाव के लिए आंशिक जिम्मेदारी दी जाएगी.

वहीं, प्रत्याशियों की घोषणा के सवाल पर पूनिया ने कहा कि कोर कमेटी ने टिकट घोषणों के मुझे अधिकार दे दिए थे. इसलिए कोर कमेटी की बैठक की संभावना कम है, लेकिन उनका पार्टिसिपेशन किसी ना किसी रूप में रहेगा. उपचुनावों में स्थानीय मुद्दों के साथ बेरोजगारी, किसान कर्ज माफी के मुद्दे भी हावी रहेंगे.

पूनिया ने कहा कि तीनों क्षेत्रों में किसान भी रहते हैं, इसलिए कर्ज माफी मुद्दा रहेगा. संविदाकर्मी भी रहते हैं, उनका नियमितिकरण भी मुद्दा होगा. इन तीनों ही क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बड़ी चुनौती है, इसलिए यह भी मुद्दा चुनाव में गूंजेगा. इसके अलावा वहां के लोकल शिक्षा, पेयजल जैसे इश्यू भी चुनाव में उठाए जाएंगे. पूनियां ने कहा कि सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से जीतने की कोशिश करेगी. मगर जनता का मिजाज विपरीत है. पंचायत चुनााव में भी भाजपा को यहां फायदा मिला थाय

उन्होंने कहा कि उप चुनाव के प्रचार में केंद्रीय स्तर के नेताओं के आने की संभावना कम है. इसका कारण पांच राज्यों के चुनाव में सभी जुटे हुए हैं. इसके अलावा राजस्थान भाजपा के भी कई नेता वहां गए हुए हैं. सभी नेताओं को जैसे-जैसे वक्त मिलेगा वो प्रचार में जाएंगे.

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) के प्रचार में सक्रिय होने के सवाल पर पूनिया ने कहा कि हमने पार्टी के सभी नेताओं से आग्रह किया है कि जिनको जैसा समय रहे, नीचे से जैसी मांग आए उसके अनुसार नेताओं के कार्यक्रम बनेंगे.

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