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PHED के डेढ़ करोड़ के GPS टेंडर पर सवाल, एडिशनल चीफ सैक्रेट्री को पहुंची शिकायत

Jaipur: पिंकसिटी में डेढ़ करोड़ के जल परिवहन (Water Transport) जीपीएस टेंडर पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल ये कि बिना प्रतिस्पर्धा के एक ही फर्म को फायदा पहुंचाकर इंजीनियर्स बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं.

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आरोप लग रहे हैं कि बिना कारण दूसरी फर्म को बाहर कर पुरानी कंसोल फर्म को फायदा पहुंचाया जा रहा है. पूरे मामले की शिकायत एडिशनल चीफ सैक्रेट्री सुधांश पंत (Sudhansh Pant) तक पहुंचा तो विभाग में हलचल हो गई.

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चीफ इंजीनियर कर रहे हैं जांच
जयपुर (Jaipur) में पेजयल परिवहन सप्लाई में जब से जीपीएस सिस्टम लागू हुआ है, तब से जलदाय विभाग एक ही फर्म कंसोल कंपनी जीपीएस ट्रेकिंग सिस्टम संभाल रहा है. हर साल इसी फर्म को टेंडर दिया जा रहा है, लेकिन फिर भी पानी की चोरी हो रही है. अबकी बार भी निविदा निकली तो दोनों एसई ने इसी फर्म का नाम आगे करते हुए दो फर्मों को बाहर कर दिया, लेकिन इंजीनियर्स की मेहरबानी से पहले ही मामले की शिकायत एडिशनल चीफ  सैक्रेट्री और चीफ इंजीनियर सीएम चौहान तक पहुंच गई है. निविदा में दूसरी फर्म रीलएप्प टेक्नोलॉजीस फर्म ने इस संबंध में शिकायत की है. इससे पहले अतिरिक्त चीफ इंजीनियर मनीष बेनीवाल को शिकायत की गई थी.

दोनों एसई ने खारिज किया आवेदन
नार्थ एसई अजय सिंह राठौड़ ने रीलएप्प टैक्नोलॉजीस फर्म का आवेदन ये कहते हुए खारिज कर दिया कि निविदा से संबंधित पूरे दस्तावेज विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपडेट नहीं हुए, जबकि एसई साउथ सतीश जैन ने तो रजिस्ट्रर फर्म ही नहीं बताया जबकि फर्म ने सफाई दी कि हमारी फर्म दिल्ली में रजिस्टर है, जिसके बाद एडिशनल चीफ इंजीनियर मनीष बेनीवाल ने भी सुनवाई के दौरान एसई का फैसला सही माना. इसके बाद रीलएप्प टैक्नोलॉजीस फर्म ने चीफ इंजीनियर को शिकायत फिर से शिकायत की.

जीपीएस सिस्टम के बाद भी चोरी रोकने में फेल
विभाग ने सिटी सर्किल साउथ के लिए 70 लाख और नार्थ के लिए 83 लाख का टेंडर निकाला है हालांकि जीपीएस सिस्टम लगाने के बाद भी विभाग में पानी की चोरी रूकती नहीं. पूरे मामले को लेकर चीफ इंजीनियर दफ्तर मे सुनवाई हो चुकी है, अब कुछ ही दिन में फैसला आएगा, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जीपीएस सिस्टम लगने के बाद भी पानी को बेचने का खेल लगातार जारी है.

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