Breaking News

Waste से Wealth बनाने का गडकरी फॉर्मूला, साल में अमेरिका-यूरोप जैसी देश की सड़कें

नई दिल्ली: सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के बारे में कहा जाता है कि वो बड़े नेता तो हैं ही, भारत सरकार में बड़े मंत्री भी हैं लेकिन वो एक सफल व्यवसायी भी हैं. वो एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने इनोवेशन और नए-नए आइडियाज को हमेशा प्रमोट किया है. ऐसे में भारत के लिए अब नेक्स्ट बिग आइडिया क्या हो सकता है इसके बारे में ‘ARTH A CULTURE FEST’ में ZEE NEWS के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी (Sudhir Chaudhary) ने नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) से खास बातचीत की और उनकी राय जानी.

सवाल: भारत को अगले पड़ाव पर ले जाने का क्या आईडिया है?
जवाब: मेरा मानना है कि कोई बेस्ट नहीं होता, यह लीडरशिप और टेक्नोलॉजी पर निर्भर करता है. जिससे आप वेस्ट को भी वेल्थ में कनवर्ट कर सकते हैं. इसपर काफी काम हुआ है. मैंने स्क्रैपिंग पॉलिसी का ऐलान किया है. जो गाड़ियां 15-20 साल पुरानी हो चुकी हैं उन्हें स्क्रैपिंग करेंगे और उसमें से निकले एल्युमिनियम, कॉपर, प्लास्टिक और अन्य मटेरियल को रिसाइकिल कर ऑटो पार्ट्स बनाएंगे. जिससे ऑटो कंपोनेंट्स 40% तक सस्ते हो जाएंगे. लीथियम बैटरी के लिए कच्चा माल मिलेगा और हम देश में ही लीथियम बैटरी बना सकेंगे. ये बैटरी ई-व्हीकल में लगेगी जिससे उसका मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट कम होगा. मौजूदा समय में देश के ऑटो मोबाइल सेक्टर का टर्नओवर 7.5 लाख करोड़ का है जिसे मैं अगले 5 साल में 10 लाख करोड़ के पार ले जाना चाहता हूं.

सवाल: देश की सड़कों को अवरोध मुक्त कैसे करेंगे?
जवाब: 3 से 3.5 साल के भीतर भारत की सड़कें अमेरिका-यूरोप जैसी होंगी. दिल्ली-मेरठ हाइवे बनने के बाद दिल्ली से मेरठ आने जाने वाले लोगों का ट्रैवेल टाइम 4.5 घंटे से घटकर 45 मिनट हो गया है. हम अक्षरधाम मंदिर से एक रोड बना रहे हैं जिससे दिल्ली से देहरादून की दूरी मात्र 2 घंटे में पूरी होगी.

सवाल: उपलब्धियां बताते हुए चेहरे पर चमक राजनेता की नहीं?
जवाब: स्वभाव से मैं राजनीतिज्ञ नहीं हूं. पॉलिटिक्स मेरे स्वभाव में नहीं है. मैं हमेशा सोचता हूं कि मैं अपने देश और समाज के लिए क्या कर सकता हूं? मैं अपने देश, गांव, गरीब और मजदूर के लिए कुछ करना चाहता हूं. लोगों को खुश देखकर मुझे बहुत खुशी होती है.

सवाल: नागपुर-मुंबई छोड़कर दिल्ली में रहना नहीं चाहते आप?
जवाब: व्यक्ति जहां रहता है वहां की परिस्ठितियों में वह ढल जाता है. हालांकि मुझे दिल्ली का खाना कम पसंद है क्योंकि यहां ज्यादा पनीर खाया जाता है वहीं, मुंबई में फूड की बहुत अधिक वेरायटी मिलती है. मैं बहुत फूडी था और मुंबई का खाना मुझे बहुत ज्यादा पसंद है.  आज भी मुंबई को मैं बहुत Miss करता हूं. लेकिन अब मैं दिल्ली में हूं और दिल्ली का हो गया हूं.

सवाल: आपके लॉन में मोर है, इसकी क्या कहानी है?
जवाब: मेरे घर के एक तरफ सोनिया गांधी जी का घर है और दूसरी तरफ मनमोहन सिंह जी का घर है. हमारे लॉन में एक ही मोर घूमता है. मेरा साझा मोर है. मोर के लिए कोर्ट पार्टी नहीं कोई भेद नहीं.

सवाल: आपका हर सपना पूरा हुआ, भविष्य की योजना क्या है?
जवाब: राजनीति अतृप्त आत्माओं का महासागर है. सिर्फ राजनीति में ही नहीं मैं तो कहूंगा कि जो करियर ओरिएंटेड लोग होते हैं वो अस्वस्थ होते हैं. मुझे मेरी हैसियत से ज्यादा मिला है. पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है. मुझे इतना ज्यादा काम करने का मौका मिला है. मैं अब हर चीज का आनंद लेता हूं, मैं अपने जीवन से बहुत खुश हूं.

सवाल: आंदोलनों में सड़क बंद करने पर आपका क्या विचार है?
जवाब: दुख होता है, जब आग लगाई जाती है, सड़के बंद की जाती हैं. हालांकि जब मैं विपक्ष में था, आंदोलन करता था, लाठियां खाता है. दरअसल, विपक्ष और आंदोलन का लोकतंत्र में रोल ही ऐसा है. जो विपक्ष में बैठता है वो ऐसी ही बातें करता है. अगर मैं सस्ताधारी पार्टी में हूं तो मैं अच्छी बातें करूंगा लेकिन जब मैं विपक्ष में हूं तो सस्ताधारी पार्टी पर आरोप ही लगाऊंगा. ऐसे समय पर मीडिया करती है तुम मैनेज हो गए क्या? ये सब तो रहता ही है लेकिन हमारा जो देश के प्रति कमिटमेंट है हमें उसे नहीं भूलना चाहिए.

यहां देखें पूरा इंटरव्यू

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *