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Knowledge: बेंगलुरु में हो रही है ABPS की बैठक, जानिए कैसे काम करता है RSS

रजत अभिनय/ नई दिल्ली:  राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) की बैठक चल रही है. इस बैठक में देश भर से इकट्ठा हुए करीब 600  प्रतिनिधि आरएसएस के नए सर कार्यवाह का चयन करेंगे. तीन साल में एक बार होने वाले इस चुनाव से ही आरएसएस की दिशा तय होती है. अक्सर आप खाकी रंग के पैंट और सफेद शर्ट में आरएसएस कार्यकर्ताओं को देखा होगा. यह भी सोचा होगा कि आखिर ऊपर से लेकर नीचे तक ये एक दूसरे से कैसे जुड़े होते हैं. कैसे चुनाव होता है और कौन व्यक्ति है, जो सारे फैसले लेता है. आइए जानते हैं….

क्या है अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS)
संघ से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पूरे देश से लोग भेजे जाते हैं. हर प्रांत अलग-अलग प्रतिनिधि भेजे जाते हैं. इस बात का ध्यान रखा जाता है कि हर बार किसी अलग कार्यकर्ता को भेजा जाए. यही कार्यकर्ता मिलकर सर कार्यवाह का चयन करते हैं. सर कार्यवाह ही वह व्यक्ति होता है, जो संघ से जुड़े व्यवहारिक और सैद्धांतिक विषयों पर निर्णय लेता है. उसकी अपनी एक टीम होती है, जिसे केंद्रीय कार्यकारिणी कहा जाता है.

कैसे होता है सर कार्यवाह का चुनाव?
जब प्रतिनिधि सभा की बैठक होती है, तो सबसे पहले वर्तमान संघ कार्यवाह अपने द्वारा किए गए कार्यों का ब्योरा देते हैं और इस बात की घोषणा करते हैं कि अब वह इस पद को छोड़ रहे हैं. यह एक किस्म का इस्तीफा होता है, जो कागज पर नहीं दिया जाता है. इस्तीफे के बाद चुनाव कराने के लिए एक टीम बनाई जाती है. वह चुनाव की घोषणा करती है. घोषणा के बाद देश आए प्रतिनिधि नए नामों का प्रस्ताव रखते हैं और उनके लिए चुनाव कराए जाते हैं.

हालांकि, खास बात है कि आज तक कभी किसी भी सर कार्यवाह के लिए चुनाव की नौबत नहीं आई. दरअसल, सर कार्यवाह का चयन ऊपर के ही लोग करते हैं. उनमें से दो तीन लोग प्रस्ताव रखते हैं. इसके बाद बाकि प्रतिनिधि ध्वनि मत उस नाम की पुष्टि कर देते हैं.

कैसे होता है सर संघचालक का चयन?
सर संघचालक के पद के लिए कोई भी चुनाव नहीं होता है. आरएसएस में यह परंपरा शुरू से चली आ रही है कि जो सर संघचालक अपनी कुर्सी छोड़ता है, वह ही नए नाम का प्रस्ताव रख देता है. आज तक सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है, जब प्रस्तावित व्यक्ति ने पद ग्रहण नहीं किया. जब राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भैया ने होन्गासान्द्रा वेण्कटरमइया शेषाद्री का नाम रखा. लेकिन शेषाद्री ने अपने खराब स्वास्थ्य को लेकर इनकार कर दिया. ऐसे में फिर कुप्पाहाली सीतारमय्या सुदर्शन सर संघचालक बने.

कैसे काम करता है संघ? 
आरएसएस का अपना पूरा काम करने का सिस्टम होता है. सबसे ऊपर सर संघचालक होते हैं. उसके बाद सर कार्यवाह होते हैं. सर कार्यवाह की अपनी टीम या कैबिनेट होती है. इसमें चार सह-सर कार्यवाह होते हैं. इसके अलावा अखिल भारतीय विभागों के प्रमुख होते हैं. इसमें शारीरिक, बौद्धिक, शिक्षण और व्यवस्था जैसे विभाग होते हैं. इस पूरी टीम को केंद्रीय कार्यकारणी कहा जाता है. ठीके ऐसी ही क्षेत्र, प्रांत, विभाग, जिला और नगर या खंड की अपनी कार्यकारिणी होती है.

प्रत्येक कार्यकारिणी के तीन प्रमुख अंग या डिपॉर्टमेंट होते हैं. इसमें संघचालक, प्रचारक और कार्यवाह होते हैं. जैसे क्षेत्र की टीम में क्षेत्र प्रचारक, क्षेत्र संघचालक और क्षेत्र कार्यवाह होते हैं. इनमें केंद्रीय टीम ही क्षेत्र और प्रांत के स्तर पर प्रचाकर और संघचालकों को तय करती है. हालांकि, यहां भी कार्यवाह के पद पर चुनाव होता है. ठीक वैसे ही प्रांत और क्षेत्र मिलकर जिला की टीम के बारे में फैसला लेते हैं.  जिला और विभाग की टीम ही नगर या खंड के टीमों को तय करते हैं.

अगर किसी विषय पर विवाद हो गया तो?
संघ के पदाधिकारी बताते हैं कि इसकी संभावना न के बराबर है. क्योंकि सभी लोगों का एक उद्देश्य, राष्ट्र की उन्नति है. जब उद्देश्य एक है, तो फैसले भी एक मत होते हैं. हालांकि, नियम के मुताबिक, केंद्रीय टीम में सर कार्यवाह जो फैसला लेते हैं, उसे ही सर संघचालक का फैसला माना जाता है. बाकि स्तर पर प्रचारक, कार्यवाह और संघचालक मिलकर फैसला लेते हैं. मान लीजिए, जिले के किसी कार्यक्रम के लिए जिला प्रचारक और विभाग प्रचारक ने कोई निर्णय लिया. लेकिन वह तब तक लागू नहीं होगा, जब तक उससे जिला संघचालक और जिला कार्यवाह सहमत न हो.

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