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यूपी पंचायत चुनाव 2021: राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव के लिए दिए निर्देश, लापरवाही बरतने पर गिरेगी गाज!

लखनऊ
उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सीटों का आरक्षण बदलेगा। हाई कोर्ट के आदेश के बाद योगी सरकार ने भी चुनाव के आधार वर्ष में बदलाव को मंजूरी दे दी है। अब आरक्षण के लिए वर्ष 2015 को आधार वर्ष माना जाएगा। मंगलवार को आधी रात इस मामले में सरकार ने बयान जारी किया। अब बुधवार की शाम तक इसका नोटिफकेशन जारी हो सकता है।

सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में 10 से अधिक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसी कड़ी में पंचायतों के आरक्षण की नियमावली में बदलाव पर भी सहमति बनी। सरकार ने 1995 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण तय किया था। हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब बुधवार को नए नियम का शासनादेश जारी कर दिया जाएगा।

कैबिनेट में यह हुआ फैसला
सरकारी बयान के अनुसार मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 में संशोधन करते हुए उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण को अंतिम रूप देने के लिए 2015 को आधार वर्ष के रूप में रखने का फैसला किया है। मंत्रिपरिषद से अनुमोदित नियमावली अब आने वाले सामान्य पंचायत चुनाव में लागू की जाएगी।

हाई कोर्ट ने खारिज किया था यूपी सरकार का आदेश
आपको बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण को अंतिम रूप देने के लिए 2015 को आधार वर्ष के रूप में रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने इसके साथ ही पंचायत चुनाव पूरा कराने के लिए सरकार और आयोग को 25 मई तक का समय दिया है।

4 से कम जिलों वाले मंडलों में जल्द निपटेंगे चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव को लेकर जिलों को पोलिंग बूथ से लेकर पोलिंग पार्टियों तक के गठन की प्रक्रिया भेज दी है। ऐसे में जिन मंडलों में 4 से कम जिले हैं, वहां दो से तीन चरणों में ही चुनाव निपट जाएंगे। अपर निर्वाचन आयुक्त वेदप्रकाश वर्मा की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि पंचायत चुनाव कुल 4 चरणों में होंगे। इस बार हर बूथ पर तीन की जगह दो मतपेटियां लगाई जाएगी। उम्मीदवार ज्यादा होने पर तीन मतपेटियों का इस्तेमाल होगा। एक ही मतपेटी में चारों पदों (ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र और जिला पंचायत सदस्य) के मतपत्र डाले जाएंगे। महिला कार्मिकों की कम संख्या देखते हुए हर बूथ पर उनकी अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। बूथ पर ड्यूटी रेंडम आधार पर लगेगी।

कर्मचारी कम होने पर पड़ोसी जिले से ड्यूटी लगाई जाएगी
उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अब आरक्षण की प्रक्रिया नए सिरे से तय होगी। मंगलवार को मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) (बारहवां संशोधन) नियमावली, 2021 के संशोधन प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। मंगलवार को आधी रात इस मामले में सरकार ने बयान जारी किया। अब बुधवार की शाम तक इसका नोटिफकेशन जारी हो सकता है।

इस तरह होंगे चुनाव
एक जिले के सभी ब्लॉक में चुनाव एक ही चरण में होंगे।
हर मंडल में एक चरण में एक जिले में चुनाव होगा।
4 से ज्यादा जिले वाले मंडलों में एक चरण में दो जिलों में चुनाव होंगे।
पोलिंग पार्टी में 4 लोग होंगे। इसमें एक पीठासीन अधिकारी होगा।

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