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इंग्लैंड से आई थी जीवन बीमा कंपनी, पहले भारतीयों का नहीं करती थी बीमा, अब देश की एक चौथाई पॉलिसी इसी के पास

नई दिल्ली: जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी…ये टैगलाइन बिलकुल सटीक है, क्योंकि आज  LIC लोगों के दिलों में एक अपनी अलग जगह बना चुकी है. इंग्लैंड से आने वाली ये कंपनी धीरे-धीरे लोगों की जिंदगी में शामिल हो गई. 1818 के दशक में इंग्लैंड से भारत आई और आज ये भारत के करोड़ो लोगों की पसंद है. उस दशक से अब तक कई बीमा कंपनियां इसकी टक्कर में आईं, लेक‍िन सारी स्पर्धाओं के बाद भी LIC बीमा कारोबार में नंबर वन बनी हुई. आज की इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे इस कंपनी ने भारत में कदम रखा और कैसे भारत की संसद से निकलकर लोगों के दिलों में पहुंच गई.

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भारतीय जीवन बीमा निगम, भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी है और देश की सबसे बड़ी निवेशक कंपनी भी है. ये पूरी तरह से भारत सरकार के अधीन है. इस सरकारी कंपनी की शुरुआत साल 1956 में हुई थी और इस समय इसमें करीब 114,000 कर्मचारी काम करते हैं. इसके अलावा करीब 29 करोड़ से ज्यादा पॉलिसी होल्डर्स भी हैं. इसका मुख्यालय भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में है.

लोगों का भरोसा एलआईसी
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) एक ऐसा नाम है, जिस पर देश के 25 करोड़ से भी ज्यादा लोग भरोसा करते हैं. बीमा कारोबार में कई कंपनियां काम करती हैं, लेक‍िन सारी स्पर्धाओं के बाद भी LIC बीमा कारोबार में नंबर वन बनी हुई है. एक आम आदमी जब भी पैसे बचाने या बीमा खरीदने के बारे में सोचता है तो उसके दिमाग में सबसे पहले एलआईसी का नाम ही आता है. लोगों को भरोसा है कि एलआईसी में लगाया गया उनका पैसा कभी डूबेगा नहीं. इसलिए देश का आम आदमी दूसरी बीमा कंपनियों के पास जाने की जगह एलआईसी का रुख करना पसंद करता है. एलआईसी आम आदमी के लिए एक भरोसेमंद बीमा कंपनी ही नहीं बल्कि एक रोजगार का विकल्प भी है. लोगों का भरोसा इस पर और ज्यादा इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि ये एजेंटों की भर्ती करने के मामले में भी पीछे नहीं रहती है.

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एलआईसी का इतिहास
जीवन बीमा अपने आधुनिक रूप के साथ 1818 दशक में इंग्लैंड से भारत आई. भारत की पहली जीवन बीमा कम्पनी कलकत्ता में युरोपियन्स के द्वारा शुरू कि गई जिसका नाम था ओरिएन्टंल लाइफ इंश्‍योरेंस. उस समय सभी बीमा कम्पनियों कि स्थापना युरोपिय समुदाय की जरूरत को पूरा करने के लिए की गई थी. ये कंपनिया भारतीय मूल के लोगों का बीमा नहीं करती थी, लेकिन कुछ समय बाद बाबू मुत्तीलाल सील जैसे महान व्यक्तियों कि कोशिशों से विदेशी जीवन बीमा कम्पनियों ने भारतीयों का भी बीमा करण करना शुरू किया. परन्तु यह भारतीयों के साथ निम्न स्तर का व्यवहार रखती थी.

पहली जीवन बीमा कम्पनी की नीव 1870 में मुंबई म्‍युचुअल लाइफ इंश्‍योरेंस सोसायटी के नाम से रखी गई
एलआईसी की वेबसाइट के मुताबिक भारत की पहली जीवन बीमा कम्पनी की नीव 1870 में मुंबई म्‍युचुअल लाइफ इंश्‍योरेंस सोसायटी के नाम से रखी गई, जिसने भारतीयों का बीमा भी समान दरों पर करना शुरू किया. पूरी तरह स्वदेशी इन कम्पनियों की शुरूआत देशभक्ति की भावना से हुई. ये कम्पनियां समाज के विभिन्न वर्गों की सुरक्षा और बीमा करण का संदेश लेकर सामने आयी थीं. भारत बीमा कम्पनी (1896) भी राष्ट्रीयता से प्रभावित एक ऐसी ही कम्पनी थी.

ऐसे हुई शुरू
भारतीय संसद ने 1956 में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन एक्ट पास किया. इस एक्ट के पास होने के  बाद एक सितंबर 1956 को भारतीय जीवन बीमा निगम नाम से बीमा कंपनी खड़ी हुई. 1956 से देश की अर्थव्यवस्था के साथ ही साथ बीमा के क्षेत्र में कई चीजें  बदलती गईं. इस क्षेत्र में कई नए प्लयर्स शामिल हुए. इसके बाद भी एलआईसी आगे ही बनी रही. बीमा कारोबार में कई निजी बड़ी कंपनियों ने भी अपने कदम रखे लेकिन वो इससे आगे नहीं बढ़ पाईं. पूरे बीमा कारोबार में एलआईसी अभी भी 69 फीसदी की भागीदारी रखती है. वित्त वर्ष 2017-18 में एलआईसी ने नए कारोबार में करीब 8 फीसदी की ग्रोथ हासिल की.

बीमा व्यापार के लिए नहीं बना था कोई कानून
1912 से पहले भारत में बीमा व्यापार के लिये कोई भी कानून नहीं बना था. 1912 में लाइफ इंश्‍योरेंस कम्पनी एक्ट और प्रोविडेन्ड फन्ड एक्ट पारित हुए, जिसके परिणामस्वरूप बीमा कम्पनियों के लिए अपने प्रीमियम रेट टेबल्स और पेरिओडिकल वैल्युएशन्स को मान्यता प्राप्त अधिकारी से प्रमाणित करवाना आवश्यक हो गया. मगर इस धारा ने विदेशी और भारतीय कम्पनियों के प्रति कई स्तर पर भेद-भाव भर दिया, जो भारतीय कम्पनियों के लिये हानिकारक था. 20वीं सदी के पहले दो दशकों में बीमा का व्यापार तेज़ी से बढ़ा. 44 कम्पनियों ने जहां 22,24 करोड़ रूपये का व्यापार किया, वहीं 1938 के आते- आते कम्पनियों की संख्या बढ़ कर 176 हो गई, जिनका कुल व्यापार 298 करोड़ रूपये था. बीमा कम्पनियों के तेज़ी से बढ़ते हुए उद्योग को देखकर आर्थिक रूप से कमजोर कुछ कम्पनियां भी सामने आईं, जिनकी योजनाएं बाद में बुरी तरह नाकाम हुईं.

बाजार में बहुत सी पॉलिसी मौजूद, ये पांच सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली पॉलिसी
एलआईसी की कई पॉलिसी बाजार में मौजूद हैं, लेकिन क्या आपको पता है इसमें कौन सी पॉलिसी बेहतर है और किसे लेना चाहिए. यदि आप अपने परिवार में अकेले ही कमाने वाले हैं और मासिक सैलरी (Salary) पर काम करते हैं तो आपके लिए जीवन बीमा पॉलिसी कराना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है. हम आपको बताने जा रहे हैं भारतीय जीवन बीमा कॉरपोरेशन (LIC) की 5 बड़ी जीवन बीमा पॉलिसी के बारे में. LIC की 5 पॉलिसी ऐसी हैं जिसे लेकर आप अच्छा रिटर्न पा सकते हैं.

कन्यादान पॉलिसी (Kanyadan Policy)
LIC की 5 टॉप पॉलिसी की बात करें तो इसमें पहला स्थान एलआईसी जीवन लक्ष्य पॉलिसी हो सकती है. जैसा इसका नाम है, वैसा ही इसका काम भी है. नाम से जाहिर है कि जीवन में आपने कोई लक्ष्य तय किया है तो उसे पूरा करने के लिए इस पॉलिसी को ले सकते हैं. इस पॉलिसी को आप टर्म राइडट और एक्सिडेंटल डेथ एंड डिसेबलिटी राइडर के साथ ले सकते हैं. इस पॉलिसी में अगर बीमाधारक की Death हो जाती है तो प्रीमियम माफ कर दिया जाता है और मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने पर पैसा मिल जाता है. इससे आपका आर्थिक लक्ष्य पूरा हो जाता है. बीमाधारक की मृत्यु हो जाने के बाद सम एश्योर्ड का 10 फीसद हिस्सा हर साल नॉमिनी को दिया जाता है. यह पॉलिसी कन्यादान पॉलिसी के नाम से भी प्रचलित है. बच्चों के भविष्य के लिए यह प्लानिंग सबसे अच्छा माना जाता है.

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जीवन उमंग पॉलिसी (Jeevan Umang Policy)
LIC की ये एक आजीवन बीमा योजना है. इसे साझेदारी योजना भी कहते हैं क्योंकि इसमें फाइनल एडिशन बोनस भी मिलता है. इसमें प्रीमियम भुगतान अवधि के बाद बीमित रकम के आठ फीसद का लाभ आजीवन या 100 साल की आयु तक मिलता है. अगर आप 100 साल तक जीवित रहते हैं तो आपको बहुत बड़ी मैच्योरिटी मिलती है. इससे पहले कुछ हो जाता है तो नॉमिनी को डेथ बेनिफिट के रूप में बहुत बड़ी राहत मिलती है. इस पॉलिसी में लोन सुविधा भीहै. इसमें जोखिम कवरेज पॉलिसी की अवधि के अंत तक होता है.

जीवन लाभ पॉलिसी (Life benefit policy)
दूसरी पॉलिसी जीवन लाभ है. अगर आप पैसा लगाकर ज्यादा रिटर्न पाना चाहते हैं तो यह पॉलिसी कारगर साबित हो सकती है. इस पॉलिसी का रिटर्न काफी अच्छा है. इस पॉलिसी को भी टर्म और एक्सिडेंटल डेथ राइडर के साथ लेने की सलाह दी जाती है.

पॉलिसी जीवन आनंद (Policy Jeevan Anand)
यह LIC की सबसे ज्यादा बिकने वाली पॉलिसी में एक है. ये पूरे जीवन की पॉलिसी है जिसमें चुने हुए समय पर मैच्योरिटी मिल जाती है और उसके बाद भी आपके चुने हुए सम एस्योर्ड की कवरेज रहती है. जो लोग अपनी पॉलिसी की मैच्योरिटी पाना चाहते हैं, साथ ही अपने पीछे कुछ छोड़ कर जाना चाहते हैं, उनके लिए यह सबसे अच्छी पॉलिसी है.

जीवन शांति पॉलिसी (Jeevan Shanti Policy)
एक और बेहतर पॉलिसी है जिसका नाम है जीवन शांति पॉलिसी. यह उन लोगों के लिए है जो रेगुलर इनकम पाना चाहते हैं, यानी कि आगे चलकर पेंशन पाना चाहते हैं. यह एक सिंगल प्रीमियम पॉलिसी है जो फिक्स्ड इनकम की पेंशन दिलाती है. ये जॉइंट लाइफ विद रिटर्न ऑफ परचेज प्राइस की पॉलिसी है. यानी कि जब तक आप और आपके जीवनसाथी रहेंगे, उन्हें पेंशन मिलेगी. उसके बाद आपके द्वारा लगाया गया पैसा, आपके नॉमिनी को मिल जाएगा.

देश की एक बड़ी आबादी भारतीय जीवन बीमा निगम पर जमकर भरोसा करती रही है. देश के करोड़ों लोगों ने आंख मूंदकर अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा एलआईसी की योजनाओं में लगा रखा है. लेकिन हाल के वर्षों पर नजर डाली जाए तो एलआईसी के पास मौजूद नकदी के बड़े भंडार पर जोखिम बढ़ रहा है.

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