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संजय जायसवाल ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा-शिक्षा को बदहाल करने का पार्टी ने किया प्रयास

Patna: संसद का बजट सत्र चल रहा है. मंगलवार को भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और सांसद डॉ संजय जायसवाल ने संसद के परिचर्चा में भाग लिया. उन्होंने लोकसभा में वर्ष 2021-22 के लिए शिक्षा मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि ये कदम भारत को विश्वगुरु बनाने की तरफ उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है.

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शशि थरूर क्या पूछ रहे हैं
संबोधन के शुरुआत में उन्होंने शशि थरूर द्वारा सैनिक स्कूल खोलने की चुनौती पर चुटकी लेते हुए कहा कि उन्हें बजट को ठीक से पढ़ने की सलाह दी. जो हमारे सैनिक स्कूल हैं, उन्हें खोलने का काम शिक्षा मंत्री का नहीं होता बल्कि रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) का होता है. उन्होंने कहा, ‘थरूर जी की अंग्रेजी और ज्ञान के हम सभी कायल हैं. वह किस ज्ञान के आधार पर रक्षा मंत्रालय के काम के बारे में शिक्षा मंत्री से पूछ रहे है, अगर वह भी बता देते तो अच्छा होता.’

2047 तक विश्वगुरू बनाने का लक्ष्य
कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों पर देश में शिक्षा के क्षेत्र में कोई सकारात्मक बदलाव लाने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नई शिक्षा नीति (New Education Policy) का लक्ष्य बुनियादी शिक्षा से अनुसंधान एवं पेटेंट तक आमूलचूल बदलाव लाकर भारत को 2047 यानी आजादी के सौ वर्ष पूर्ण होने पर विश्वगुरु बनाने का है. भारत को अगर विश्व गुरु बनना है, तो भारत अपने साहित्य से, अपने ज्ञान से, अपने लेखकों, कवियों और अपनी भाषा से ही बन सकता है, और इसके लिए शिक्षा मंत्री ने जो काम किया है उसके लिए उन्हें साधुवाद और बधाई.

कांग्रेस की रही शिक्षा में दोहरी नीति
डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस ने पुरानी चली आ रही शिक्षा में बदलाव के लिए कुछ नहीं किया, बल्कि संस्कृत भाषा, प्रेमचंद, रामधारी सिंह दिनकर जैसे भारत के विद्वानों और साहित्यकारों को पीछे रखने का प्रयास किया. उन्होंने किस कदर शिक्षा को बदहाल करने का प्रयास किया, इसका एक प्रमुख उदहारण 2009 में लाई गयी बच्चों को फेल नहीं करने वाली नीति है. उन्होंने आगे कहा कि इस बजट में विश्वस्तरीय संस्थानों के लिए 176 प्रतिशत राशि की वृद्धि की गयी है और डिजिटल ई-लर्निंग में 20 प्रतिशत आवंटन बढ़ाया है. भारत पेटेंट कराने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है और भारत सरकार अनुसंधान के प्रति गंभीर है.

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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ‘नयी शिक्षा नीति युवाओं में अनुशासन, जिज्ञासा, रचनात्मकता का भाव लाने और उनके विकास के प्रति समर्पित है. ये नई शिक्षा नीति भारतीयता का मान कराएगी.’ डॉ जायसवाल ने कहा, ‘मुगलों और विदेशी आक्रांताओं को महिमा मंडित करने वाली शिक्षा नीति से नई शिक्षा नीति मुक्ति दिलाएगी.’ इसके लिए विशेष तौर पर शिक्षाविद् और शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को आभार प्रकट करता हूं.’

तो कैसे होगा बच्चों का विकास?
डॉ. जायसवाल ने स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों के प्रति चिंता जताते हुए कहा कि देश में चल रहे कोचिंग संस्थानों के नियमन को लेकर प्रयास करने की जरूरत है. 10वीं कक्षा से पहले किसी कोचिंग संस्थान में मेडिकल या इंजीनियरिंग को लेकर चर्चा नहीं होनी चाहिए. अगर बच्चे शुरू से ही इस बारे में सोचेंगे तो उनका विकास कैसे होगा.

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