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बिहार के लाल ने विजय हजारे ट्रॉफी में मचाया धमाल, उठने लगे थे फॉर्म पर सवाल

Patna: वैसे तो विजय हजारे ट्रॉफी (Vijay Hazare Trophy) का हर सीजन इक्का-दुक्का दर्शकों के मौजूदगी के बीच खेला जाता है. लोगों की दिलचस्पी बस लास्ट के कुछ मैचों में रहती है की ट्रॉफी कौन जीता. लेकिन 2021 का सीजन ऐसा बिल्कुल भी नहीं थी. इस बार लोगों टूर्नामेंट खत्म होने के बाद ये सोच रहे हैं कि ऐसा सीजन क्या कभी फिर आएगा? हम ऐसा इसलिए कह रहें हैं, क्योंकि दो युवा भारतीय बल्लेबाजों ने अपने बैट को ‘गदा’ बनाकर ऐसा घुमाया कि ना केवल उनके सामने जो गेंदबाज आए उनके चारों खाने चित हुए, बल्कि रिकार्ड ऐसे टूटे कि आने वाले कई सालों तक उन्हें तोड़ना काफी मुश्किल होगा.

दरअसल, युवा सनसनी देवदत्त पडिकल (Devdutt Padikkal) और पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) की चर्चा इन दिनों खूब हो रही है. लेकिन आज हम बात करेंगे उस युवा बल्लेबाज की जो अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में धूमकेतु की तरह चमके, लेकिन कुछ समय से संघर्ष करते नजर आए है. जो पहले आईपीएल (IPL) में फ्लॉप हुए, उसके बाद कगांरूओं के खिलाफ टेस्ट मैचों में असफल होने के बाद लगा कि उनके करियर पर आने वाले समय में ग्रहण लग जाएगा. लेकिन हुआ इसके उलट. क्रिकेट के भगवान की एक छोटी सलाह उनके इतनी काम आई कि छोटे से कद के बल्लेबाज ने अपने शॉटस से मैदान पर धुंआ ही धुंआ ही भर दिया. 8 मैच, एक दोहरे शतक समेत 4 शतक 165.40 का अविश्वसनीय बल्लेबाजी औसत के साथ 827 रन बनाए. इन रनों से पृथ्वी ने ना जाने कितने रिकार्डस विजय हजारे ट्रॉफी में बना डाले.

पृथ्वी के लिए सफर इतना आसान नहीं था
हालांकि, बिहार से मुंबई गए पृथ्वी के लिए सफर इतना आसान नहीं था. जब वह 4 साल के थे, तब उनकी मां का निधन हो गया, जिससे वह काफी अकेला महसूस करने लगा थे. उस एकांत को दूर करने के लिए पृथ्वी ने अपना ध्यान क्रिकेट पर केंद्रित किया. उनके पिता पंकज शॉ ने पृथ्वी के करियर के लिए बहुत कुछ बलिदान किया. उन्होंने अपने बढ़ते कपड़े का कारोबार को बंद कर दिया, जहां वह थोक विक्रेताओं से कपड़े खरीदते थे और सूरत एवं बड़ौदा में जाकर बेचते थे.

वहीं, जब पृथ्वी को छात्रवृत्ति मिलनी शुरू हुई, तो उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ. जिसके चलते शिवसेना के विधायक संजय पोटनीस ने उन्हें वोकला में एक घर दिया, जो बांद्रा में उनके ट्रेनिंग ग्राउंड के नजदीक था. उनके पिता ने पृथ्वी के लिए कलिना में एयर इंडिया के मैदान पर गेंदबाजी कराते हुए, एक अभ्यास गेंदबाज के रूप में भी कार्य किया है.

राहुल द्रविड़ की कोचिंग में जीता एशिया कप
पृथ्वी को वर्ष 2011 में पॉली उमरीगर इलेवन के लिए खेलने के लिए चुना गया था. वर्ष 2013 में पृथ्वी ने मात्र 14 वर्ष की उम्र में मुंबई स्थित हैरिस शील्ड एलिट डिवीजन मैच में 330 गेंदों में 546 रन बनाकर रिकॉर्ड अपने नाम किया .पृथ्वी शॉ हैरिस शील्ड एलिट डिवीजन मैच में भारतीय U–19 टीम का हिस्सा थे, जिसके चलते उन्होंने राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) की कोचिंग में एशिया कप अंडर-19 (Asia Cup U-19) टूर्नामेंट जीता.

उन्होंने रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) के वर्ष 2016-17 के सत्र में मुंबई के लिए तमिलनाडु के खिलाफ अपना पहला प्रथम श्रेणी शतक (120 रन) बनाया. इसके बाद जनवरी 2018 में, न्यूजीलैंड में आईसीसी अंडर -19 विश्व कप में भारतीय टीम का नेतृत्व करते हुए जीत दर्ज की. पृथ्वी के लगातार घरेलू क्रिकेट में शानादर प्रर्दशन का इनाम उन्हें 2018 में मिला जब उन्हें वेस्टइडींज के खिलाफ भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली. यहां उन्होंने अपने डेब्यू मैच में शतक जड़ा. इसके बाद में उन्हें 2020 में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे खेलने का मौका मिला. लेकिव तभी उनके फॉर्म में गिरावट आ गई और टीम से बाहर हो गए. लेकिन विजय हजारे ट्रॉफी में शानदार प्रर्दशन से लगता है कि उन्होंने अपना बुरा वक्त पीछे छोड़ दिया है. तभी तो उन्होंने इस तोडू प्रर्दशन के बाद कहा कि ‘मैं विरार का लड़का हूं, गलियों से आया हूं, जानता हूं कैसे बाउंस बैक करना है.’

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